Tuesday, May 31, 2016

गर्मियों में स्किन के लिए काफी कारगार है टोमैटो स्किन स्पा


गर्मियों में स्किन के लिए काफी कारगार है टोमैटो स्किन स्पा


गर्मियों का मौसम यूं तो कई बीमारियों को साथ लाता है जिसमें से स्किन यानि त्वचा की समस्यायें काफी अहम हैं।


चिलचिलाती गर्मियों की मार से बच नहीं सकते हैं मगर कुछ उपाय करके इसके असर को कुछ कम जरुर कर सकते हैं।दाने, काले धब्बे तैलीय त्वचा, लाली, खुजली, काले धब्बे, झुर्रियां, आदि, गर्मियों में खासे परेशान करते हैं।

यही वजह है कि लाल रसदार टमाटरों को अपना सबसे अच्छे दोस्त बनाने के लिए गर्मियों का समय काफी अच्छा है।टोमेटो स्किन स्पा इन तमाम चीजों से निपटने के लिए बेहद कारगर है।





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बढ़ती उम्र में खुद को जवां बनाए रखने के ये 6 दमदार और रामबाण नुस्खें


बढ़ती उम्र में खुद को जवां बनाए रखने के ये 6 दमदार और रामबाण नुस्खें


बढ़ती उम्र के साथ शरीर की देखभाल बेहद जरुरी होती है। इस दौरान आप छोटी-छोटी बातों को ध्यान में रखकर और उन्हें दिनचर्या में शामिल कर हमेशा जवां रह सकते हैं। आईए जानते हैं उन सात बातों को जो आपको हमेशा ऊर्जावान बनाए रखने के साथ जवां बनाए रखते हैं।

नींद
शरीर की उर्जा और उसकी सेहत को बनाए रखने के लिए अच्छी और पूरी नींद का होना बेहद जरुरी है। सात से आठ घंटे की नींद रोजाना लेनी जरूरी होती है जिससे शरीर चुस्त-दुरुस्त और तंदुरुस्त रहता है और बुढ़ापे का आक्रमण भी देर से होता है और आप लंबे समय तक जवां बने रहते हैं।
डेली रूटीन
शरीर को रोजाना अच्छी आदतों के साथ ढालना जरुरी होता है। सुबह उठना, कसरत करना, पार्क में सैर के लिए जाना ये सब वो आदतें है जो रोजाना करने से शरीर की सेहत लंबे समय तक बनी रहती है। इसी तरह से रात में सोने की भी आपकी एक निश्चित दिनचर्या होनी चाहिए जिससे आप लंबे समय तक जवां बने रहते हैं।
झपकी ना लें
कामकाज के बीच झपकी लेने से ऊर्जा का प्रवाह होता है। लेकिन झपकी लेने की बजाय आप शरीर को किसी और काम में लगा दे। आप इस दौरान टहलने के लिए चले जाए। बागीचे में जाकर गार्डेनिंग करे या फिर खुद के लिए चाय बनाकर उसकी चुस्की ले। इससे आपका शरीर ज्यादा सक्रिय रहेगा जिससे रात में आपको अच्छी नींद आएगी।
रात में कॉफी का सेवन नहीं करें
हर वक्त कॉफी का सेवन सेहत के लिहाज से अच्छा नहीं होता। रात में सोने से पहले कॉफी का सेवन बिल्कुल बंद कर देना चाहिए। चूंकि कॉफी के सेवन से उर्जा मिलती है इसलिए रात में पीने से आपकी नींद प्रभावित हो सकती है। इसलिए बेहतर है कि सोने से कुछ घंटे पहले कॉफी का सेवन हर्गिज नहीं करे।  
सेहत और कसरत
शरीर की ताजगी और उसे उर्जावान बनाए रखने के लिए कसरत या वर्जिश रामबाण का काम करता है। रोजाना सिर्फ 20 मिनट की कसरत आपके शरीर को पूरे दिन तरोताजा बनाए रखता है। साथ ही इससे आपको रात में गहरी नींद भी आती है।  
खानपान
खानपान से आपके सेहत का गहरा संबंध होता है। इसलिए अपने खानपान में उन्हीं चीजों को तरजीह दे जिससे पर्याप्त उर्जा मिलती हो और जो आपकी सेहत के लिए बेहतर हो। पौष्टिक खाने के साथ इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि आप ओवर डायट भूलकर बी नहीं ले। ओवर डायट की स्थिति में आपकी नींद प्रभावित होती है और वजन तेजी से बढ़ता है।





















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पेट और जांघों को पतला करने के लिए योग के 5 टिप्स!



वजन घटाने के लिए योग को सबसे कारगर और सरल तरीका माना जाता है। योग को लेकर सबसे बढि़या बात यह है कि इसे किसी भी उम्र के लोग कर सकते हैं। योग किसी भी उम्र वर्ग के लिए खासा लाभदायक है। गर्भवती महिलाओं को भी कुछ विशेष सावधानियों के साथ योग करने की सलाह दी जाती है। ज्ञात हो कि तनाव के चलते कई तरह की बीमारियां जन्‍म लेती हैं। लेकिन योग के आसनों के जरिये इससे निजात पाया जा सकता है। वजन घटाने और फिट रहने के लिए योग काफी कारगर है और इससे तनाव का स्‍तर घटने के साथ व्‍यक्ति का आत्‍मविश्‍वास भी बढ़ता है। नीचे योग के कुछ आसनों के बारे में जिक्र किया गया है, जिसको निरंतर करने से वजन घटाने में काफी मदद मिलती है।




चक्रासन: योग के तहत यह एक अहम आसन है, जिसके जरिये आप अपने पेट को दुरुस्‍त और संबंधित मसल्‍स को पूरी तरह ठीक रख सकते हैं। इस आसन में पहले आप पीठ के सहारे लेट जाएं, फिर घुटनों को मोड़ें और अपने पैरों के तलवे को कुछ दूरी बनाकर जमीन पर टिकाकर रखें। फिर अपने हाथों को शरीर की दिशा में ले जाएं। ध्‍यान रहे कि हथेलियां नीचे की ओर रहे। आप अपने हाथों को मिलाकर साथ रखें और फिर अपने शरीर को उपर की ओर उठाएं। इस अवस्‍था में तीस सेकेंड से लेकर 01 मिनट तक रहें। फिर शरीर को धीरे धीरे सतह पर ले आएं। इस अभ्‍यास को पांच बार दोहराएं।

भुजंगआसन : इस आसन में शरीर की आकृति फन उठाए हुए नाग के समान हो जाती है इसीलिए इसको नाग आसन, भुजंगासन या सर्पासन कहा जाता है। इस आसन से पेट की चर्बी घटती है तथा रीढ़ की हड्डी सशक्त बनती है। दमे की, पुरानी खांसी अथवा फेफड़ों संबंधी अन्य कोई बीमारी हो, तो उनको यह आसन करना चाहिए। इससे बाजुओं में शक्ति मिलती है। मस्तिष्क से निकलने वाले ज्ञानतंतु बलवान बनते हैं। पीठ की हड्डियों में रहने वाली तमाम खराबियां दूर होती है। कब्ज दूर होता है। इस आसन को करते समय अकस्मात् पीछे की तरफ बहुत अधिक न झुकें। उल्टे होकर पेट के बल लेट जाए। ऐड़ी-पंजे मिले हुए रखें। ठोड़ी फर्श पर रखी हुई। कोहनियां कमर से सटी हुई और हथेलियां ऊपर की ओर। इसे मकरासन की स्‍थिति कहते हैं। धीरे-धीरे हाथ को कोहनियों से मोड़ते हुए आगे लाएं और हथेलियों को बाजूओं के नीचे रख दें। ठोड़ी को गरदन में दबाते हुए माथा भूमि पर रखे। पुन: नाक को हल्का-सा भूमि पर स्पर्श करते हुए सिर को आकाश की ओर उठाएं। फिर हथेलियों के बल पर छाती और सिर को जितना पीछे ले जा सकते हैं ले जाएं किंतु नाभि भूमि से लगी रहे। 0 सेकंड तक यह स्थिति रखें। बाद में श्वास छोड़ते हुए धीरे-धीरे सिर को नीचे लाकर माथा भूमि पर रखें। छाती भी भूमि पर रखें। पुन: ठोड़ी को भूमि पर रखें और हाथों को पीछे ले जाकर ढीला छोड़ दें। शुरू में 30 सेकेंड करने के बाद लंबे अभ्यास के बाद इसे तीन मिनट तक किया जा सकता है। कम से कम दो से पांच बार कर सकते हैं।

धनुरासन : इस आसन को करने से शरीर की आकृति खींचे हुए धनुष के समान हो जाती है, इसीलिए इसको धनुरासन कहते हैं। यह आसन मेरुदंड को लचीला एवं स्वस्थ बनाता है। पेट की चर्बी कम होती है। हृदय मजबूत बनाता है। गले के तमाम रोग नष्ट होते हैं। कब्ज दूर होकर जठराग्नि प्रदीप्त होती है। श्वास की क्रिया व्यवस्थित चलती है। सर्वप्रथम मकरासन में लेट जाएं। मकरासन अर्थात पेट के बल लेट जाएं। ठोड़ी को भूमि पर टिका दें। हाथ कमर से सटे हुए और पैरों के पंजे एक-दूसरे से मिले हुए। तलवें और हथेलियां आकाश की ओर रखें। घुटनों को मोड़कर दाहिने हाथे के पंजे से दाहिने पैर और बाएं हाथ के पंजे से बाएं पैर की कलाई को पकड़ें। सांस लेते हुए पैरों को खींचते हुए ठोड़ी-घुटनों को भूमि पर से उठाएं तथा सिर और तलवों को समीप लाने का प्रयत्न करें। जब तक आप सरलता से सांस ले सकते हैं इसी मुद्रा में रहें। फिर सांस छोड़ते हुए पहले ठोड़ी और घुटनों को भूमि पर टिकाएं। फिर पैरों को लंबा करते हुए पुन: मकरासन की स्थिति में लौट आएं।

पश्चिमोत्‍तनासन : पीठ में खिंचाव उत्पन्न होता है, इसीलिए इसे पश्चिमोत्तनासन कहते हैं. इस आसन से शरीर की सभी मांसपेशियों पर खिंचाव पड़ता है। पशिच्मोत्तासन के द्वारा मेरूदंड लचीला व मजबूत बनता है जिससे बुढ़ापे में भी व्यक्ति तनकर चलता है और उसकी रीढ़ की हड्डी झुकती नहीं है। इसके अभ्यास से शरीर की चर्बी कम होकर मोटापा दूर होता है तथा मधुमेह का रोग भी ठीक होता है। अपने पैर को सामने की ओर सीधी करके बैठ जाएं। दोनों पैर आपस में सटे होने चाहिए। पीठ को इस दौरान बिल्‍कुल सीधा रखें और फिर अपने हाथों से दोनों पैरों के अंगूठे को छुएं। ध्‍यान रखें कि आपका घुटना न मुड़े और अपने ललाट को नीचे घुटने की ओर झुकाए। 5 सेकेंड तक रुकें और फिर वापस अपनी पोजीशन में लौट आएं। यह पोजीशन किडनी की समस्‍या के साथ क्रैम्‍स आदि जैसी समस्‍या से भी निजात दिलाता है।

चक्‍की चलनासन : योग का यह आसन पेट की चर्बी को दूर करने में काफी कारगर है। इससे वजन कम करने में भी फायदा मिलता है। पहले आप जमीन पर आराम से बैठ जाएं। इस दौरान अपने पैरों को सामने की ओर से फैलाएं। दोनों पैर आपस में सटे रहें, इस बात का ध्‍यान रखें। अब अपने दोनों हाथों को आपस में मिलाकर पकड़ लें और फिर बिना घुटनों को मोड़े सर्कुलर (चक्र के तौर पर) दिशा में घुमाएं। दस बार इस आसन को घड़ी की दिशा में घुमाएं और फिर कुछ देर रुकने के बाद इस बार घड़ी की विपरीत दिशा में घुमाएं। फिर धीरे-धीरे छोड़ दें।


















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Monday, May 30, 2016

इस पैक को लगा कर पाएं स्‍ट्रेच मार्क से हमेशा के लिये छुटकारा



स्‍ट्रेच मार्क एक ऐसी समस्‍या है जो आपको मन चाहे कपड़े पहनने से रोकती है। अगर बाजुओं पर स्‍ट्रेच मार्क है तो आप स्‍लीवलेस टॉप नहीं पहन सकती हैं और अगर पेट पर स्‍ट्रेच मार्क है तो, साड़ी पहननी मुश्‍किल हो जाती है। इन घरेलू उपचार से क्‍या आप जानती हैं कि आलू का रस और कैस्‍टर ऑइल, दो ऐसी चीज़ें हैं, जो फटी हुई स्‍किन को दुबारा रिपेयर करने का काम अच्‍छी तरह से करती हैं। स्‍ट्रेच मार्क से निजात आज हम जो आपको स्‍किन पैक बनाना सिखाएंगे, उसमें विटामिन ई काफी मात्रा में होता है, जो आपके मार्क को धीरे धीरे दूर करेगा। तो अगर आप भी स्‍ट्रेच मार्क से परेशान हैं, तो इस पैक को कुछ दिनों तक नियमित लगाइये। आइये जानते हैं इसे बनाने का तरीका -  सामग्री- कैस्‍टर ऑइल- 1 चम्‍मच  आलू का जूस- 2 चम्‍मच विधि - सबसे पहले मिक्‍सर में आलू के पीस काट कर उसे ब्‍लेंड कर लें और जूस निकाल लें।  अब दो चम्‍मच जूस लें और उसमें 1 चम्‍मच कैस्‍टर ऑइल का मिलाएं।  इस लेप को किसी भी स्‍ट्रेच मार्क वाली जगह पर लगाएं और 30 मिनट तक छोड़ दें।  उसके बाद त्‍वचा को गुनगुने पानी और साबुन से धो कर साफ कर लें





















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धूप में बाइक चलाते समय ज़रूर रखे


मई-जून की तपती धूप में अगर आपको बाइक या स्कूटी से ट्रैवल करना पड़ता है, ऐसे में अगर आपने लापरवाही बरती तो आप बीमार हो सकते हैं, ऐसे में खुद को सेफ रखने क्‍या सावधानी बरतें, इसके बारे में जानने के पढ़ें ये स्‍लाइडशो।

1
सनस्क्रीन लगाए



वैसे तो ये बात बताने की जरूरत अब रह नहीं गई है फिर भी धूप में बाहर निकलते समय सबसे पहले सनस्क्रीन का प्रयोग जरूर करे। सनस्क्रीन लगाए बिना बाइक और स्कूटी ना चलाएं। ये आपकी त्वचा को सूरज की अल्ट्रावायलेंट किरणों से बचाता है। सनस्क्रीन का एसपीएएफ भी चेक करना ना भूले। 15 एसपीएफ वाली सनस्‍क्रीन सूर्य की अल्‍ट्रावॉयलेट की किरणों से बचाव करती है।

2
सनग्लासेस लगाना



बाइक चलाते समय हेलमेट पहनना जितना जरूरी है ठीक वैसे ही सनग्लासेस लगाना। सनग्लासेस लगाने से और ड्राइविंग के दौरान आंखों में आने वाली धूल से भी बचाते हैं। साथ ही सूरज की किरणों से भी आपको बचाते है क्योंकि कम ही हेलमेट्स टिंटेड फाइबर के आते है। और सनग्लासेस लगाने से स्टाइल स्टेटमेंट भी तो बनाता ह

3
हेड स्कार्फ



हेलमेट को सीधे बालों पर लगाने से बालों को नुकसान पहुंचता है। हेलमेट के कारण बालों में होने वाले पसीने से बैक्टीरिया और कीटाणु जमा होते है। जबकि हेट स्कार्फ इस पसीने को सोखकर बालों को नुकसान पहुंचाने से रोकता है। ये हेलमेट और बालों के बीच में एक लेयर की तरह काम करता है। अगर गर्मी ज़्यादा हो तो आप हैड स्कार्फ को गीला करके भी बांध सकते हैं। ये आपको गर्मी से तो बचाता ही है, साथ ही स्टाइलिश लुक भी देता है।
Image Source-Getty


4
हैंड ग्‍लब्‍ज



बाइक या स्कूटी चलाते वक्त आपके हाथ सीधे धूप के संपर्क में आते है जिससे औप टैनिंग के साथ साथ सनबर्न की शिकायत भी हो सकती है। धूप में ज़्यादा एक्सपोज़ होने से स्किन संबंधी बीमारियों का भी खतरा रहता है। इसलिए धूप और गर्मी से अपने हाथों को जलाने से बचाने के लिए आप आर्टीफिशियल स्लीव्ज और ग्‍लब्‍ज को पहन सकते है। आजकल बाजार में ये कई स्टाइल में उपलब्ध है। आप चाहे को प्रिटेंड या प्लेन गलव्ज ले सकते है।

5
जूते पहनें



गर्मियों मे जूते पहनना अच्छा तो नहीं लगता पर धूप से बचने के लिए ये एक बेहतर तरीका होता है। हाथों के अलावा पैर भी धूप के सीधे संपर्क में रहते है। कई बाइकर्स पैरों के आस-पास रफ स्किन होने की शिकायत करते हैं, असल में सड़कों की सतह नैचुरली हीट सोखती है और गर्म हो जाती है। इसके साथ ही आपके टू-व्हीलर का इंजन भी हीट जनेरेट करता है। दोनों मिलकर आपके पैरों का बुरा हाल कर देते हैं।

























































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Saturday, May 28, 2016

नमक के उपयोग एवं फायदे



1. चावल में पिसा नमक डालकर रखें, कीड़े नहीं लगेंगे।

2. नमक मछली, पनीर, अचार आदि को सुरक्षित रखता है।

3. समुद्र के जल से स्नान करने से त्वचा रोग ठीक होता है।

4. स्याही लगे कपड़े को नमक के जल से धोयें, धब्बे दूर होंगे।

5. दांतों में दर्द होने पर गर्म पानी में नमक डालकर गरारे करें।

6. नमक के पानी से चेहरा धोने से प्राकृतिक चमक बनी रहती है।

7. दीमक वाली जगह नमक का पानी डाल दें, दीमक दूर हो जाएगा।

8. ताजी सब्जियों को नमक के पानी में धोएं, इससे कीड़े मर जाते हैं।

9. पीतल के बर्तन में चमक लाने के लिए नींबू के रस में नमक मिलाएं।

10. घर में नमक के पानी का पोछा लगाने से घर हर तरह से शुद्ध रहता है।

11. चीनी के बर्तन से धब्बे हटाने के लिए सिरके में नमक डाल कर साफ़ करें।

12. फूल के गुलदान में नमक वाली पानी रखने से वह लंबे समय तक ताजा रहता है।

13. लालटेन के तेल में एक टुकड़ा नमक डालने से तेल कम जलेगा और रोशनी ज्यादा देगा।

14. नमक के पानी से नियमित स्नान कर गठिया तथा किसी चोट के कारण हुए मांसपेशियों में दर्द और ऐंठन में भी आराम मिलता है।


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रूखी त्वचा से निपटने के आयुर्वेदिक नुस्खे






आयुर्वेद में किफायती और केमिकल रहित अनेक उपाय हैं जो त्वचा को मुलायम (Soft), कोमल (Supple) और सुंदर (Beautiful) बनाते हैं। इन्हें जानने से पहले आइये उन कारणों के जानते हैं जो हमारी त्वचा को रुखा बनाते हैं।

त्वचा में रुखेपन के कारण (Causes of Dryness in Skin)
उम्र का बढ़ना
मौसम में परिवर्तन
शरीर में वात (Vata) का बढ़ जाना
तनाव (Stress)
संतुलित भोजन (Balanced Diet) न ग्रहण करना

त्वचा में रुखेपन के आयुर्वेदिक नुस्खे (Ayurvedic Tips to curb Dryness in Skin)

1. सब्जियों का सेवन (Intake of Vegetables)

हमें पानी से भरी सब्जियों का सेवन करना चाहिए जो पाचन में आसान होती हैं जैसे गाजर, लौकी, खीरा, मूली आदि। यह सब्जियाँ त्रिदोषक होती हैं और हर प्रकार की त्वचा के लिए लाभदायक होती हैं। हमें प्रतिदिन कम से कम तीन सब्जियों का सेवन करना चाहिए।

2. चिड़िया की तरह सेवन (Eat Like A Bird)

परम्परागत आयुर्वेद में बताया गया है की हमें सीड्स और नट्स (Seeds and Nuts) का सेवन भोजन के साथ करना चहिये। ऐसा करने से हमारी त्वचा में अच्छा बदलाव आता है और वह साफ़ दिखाई देता है। वात के कारण हमारी तवचा खुश्क (Dry Skin) हो जाती है परन्तु सीड्स और नट्स में ओमेगा 3 (Omega 3) और प्राकृतिक फैट्स पाये जाते है जो त्वचा को संतुलन प्रदान करते हैं। इनमे फाइबर (Fiber) भी पाया जाता है जो हमारे हाजमे की कमजोरी को दूर करता है।

3. हर्बल चाय (Herbal Tea only)

वात से खुश्की बढ़ जाती है और नमी की कमी के कारण त्वचा की कोमलता नष्ट हो जाती है। इससे बचने के लिए हम गर्म पदार्थ जैसे हर्बल टी आदि का दिन में कई बार सेवन कर सकते हैं। अदरक और नींबू के मिश्रण से तैयार चाय का सेवन करने से त्वचा हमेशा चमकती रहती है। इससे पाचन भी ठीक रहता है।

4. व्यायाम कीजिये (Do Exercise)

व्यायाम से हम शरीर में वात का बढ़ना रोक सकते हैं। यही नही, व्यायाम करने से हमारे शरीर के टॉक्सिन्स पसीने के रूप में बहार निकल जाते हैं, जो स्वतः अपने आप में त्वचा की चमक बरकरार रखने में महत्वपूर्ण होता है।

5. श्वास प्रक्रिया (Breathing)

मानसिक और भावुक तनाव भी शरीर में वात बढ़ा देता है, जिससे त्वचा का रूखापन बढ़ जाता है। श्वास प्रक्रिया पर ध्यान देने से हम तनाव मुक्त हो सकते हैं और अपने शरीर में वात को बढ़ने से रोक सकते हैं।







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Friday, May 27, 2016

गर्भावस्था के दौरान इन फूड्स से बचें

गर्भावस्‍था के दौरान आहार



गर्भावस्‍था के दौरान महिला पर अपने साथ-साथ होने वाले बच्‍चे का भी दारोमदार होता है। इस दौरान अपने भोजन को लेकर उसे बहुत सचेत
रहना पड़ता है। आहार में जरा सी चूक के गंभीर परिणाम हो सकते हैं। ऐसे में बहुत से ऐसे खाद्य पदार्थ हैं जिनसे इस समय के दौरान दूर ही
रहना चाहिए। आइए हम आपको ऐसे ही फूड्स के बारे में बताते है।




शराब का सेवन न करें



गर्भावस्‍था में शराब होने वाले बच्‍चे की सेहत को नुकसान पहुंचा सकती है। वह शराब प्‍ले सेंटा के माध्यम से आसानी से बच्चे तक पहुंच जाती है। अगर आप गर्भवस्था के दौरान भी शराब का सेवन जारी रखती हैं, तो बच्‍चे के शराब स्पेक्ट्रम विकार (FASD) के साथ पैदा होने का खतरा बढ़ जाता है। शराब की कोई भी मात्रा गर्भावस्था के दौरान सुरक्षित नही मानी जाती। इसलिए, इसे नहीं लेना चाहिए।




कच्चे अंडे



कच्‍चे अंडे में हानिकारक जीव, ई-कोलाई और साल्‍मोनेला पाया जाता है। यह गर्भवती महिला की आंत्र संक्रमण का कारण बन सकता है। इसलिए
यह जरूरी हो जाता है कि गर्भावस्था के दौरान कच्चे अंडों का सेवन न किया जाए।




मछली पारे से परिपूर्ण



मछली जो पारे से परिपूर्ण होती है उनमें शार्क, स्वोर्डफ़िश, राजा प्रकार की समुद्री मछली और टाइलफिश आती है। इन सब प्रकार की मछलियों को गर्भावस्‍था के दौरान नही लेना चाहिए। कई डॉक्‍टर यह मानते हैं कि गर्भवती महिलाओं को प्रति सप्ताह में ३०० ग्राम से अधिक मछली नहीं खानी चाहिए।




सॉफ्ट चीज



गर्भवती महिला को सॉफ्ट चीज से बचना चाहिए। सॉफ्ट चीज में शामिल हैं- जैसे फिटा, ब्री, और कैमेम्बर्ट पनीर, ब्‍लू वेइनेद चीज, क्युसो ब्लांको,
क्‍युसो फ्रेस्को और फनेल। अरेइस चीज खाने के लिए सुरक्षित हो सकता है अगर उस पर पॉश्चराइड लेबल लगा हो तो।




कच्चा मांस और समुद्री भोजन सुशी के साथ



गर्भवती महिला की प्रतिरक्षा प्रणाली को गर्भावस्था के कारण समझौता करना पड़ता है। क्‍योंकि इस समय वह कई गंभीर संक्रमण की चपेट में आ सकती है। सभी प्रकार के कच्चे, दुर्लभ मांस और समुद्री भोजन में लिस्टेरिओसिस और साल्मोनेला विषाक्तता का खतरा काफी अधिक होता है। इसलिए उसे इसके सेवन से दूर रहना चाहिए। कुछ मामलों में, गर्भावस्था के दौरान लिस्तेरिओसिस श्रम अपरिपक्व का या गर्भपात का कारण बनता है।




अनपॉश्चराइड दूध और जूस



अनपॉश्चराइड दूध और कई नरम चीज से गर्भावस्था के दौरान से बचा जाना चाहिए। कोई भी डेयरी उत्पाद जो पॉश्चराइड नही है उसमें लिस्टिरिया संदूषण की क्षमता होती है। अगर चीज पर यह लेबल लगा है कि वह पॉश्चराइड दूध से बना है तो गर्भावस्था के दौरान इसका इस्‍तेमाल करना सुरक्षित हैं। लेकिन अगर लेबल से स्पष्ट नहीं हो रहा है तो इससे बचना बेहतर होगा क्‍योंकि इनमें बैक्टीरिया हो सकता है जो खाद्य जनित बीमारियों को जन्म दे सकता ह




कच्ची अंकुरित सब्जियां



गर्भावस्था के दौरान, कच्ची अंकुरित सब्जियों से बचना चाहिए क्‍योंकि बैक्टीरिया अंकुरित सब्जियों में मिल जाता हैं। इस प्रकार के कच्‍चे अंकुरित
से बचना चाहिए जैसे अल्फला, तिपतिया घास, मूली और मूंग।




कैफीन



कैफीन एक उत्तेजक और मूत्रवर्धक है। इसके सेवन से ब्‍लड प्रेशर और हार्ट बीट दोनों बढ़ जाती हैं। इसलिए गर्भवती महिलाओं के लिए इसका
इस्‍तेमाल न करने की सिफारिश की जाती हैं। इससे शरीर में तरल पदार्थ के स्तर में कमी के कारण यूरीन की आवृति बढ़ जाती है। जिसका
परिणाम डिहाइड्रेशन के रूप में सामने आता हैं।




हर्बल सप्‍लीमेंट



आमतौर पर हर्बल सप्‍लीमेंट का अन्‍य दवाओं की तरह परीक्षण नही होता है, इसलिए इसे गर्भावस्‍था के दौरान लिए सुरक्षित नही माना जाता हैं।
इसलिए जो महिला नियमित रूप से डिकैफ़िनेटेड चाय लेती है उनको गर्भावस्‍था के दौरान हर्बल सप्‍लीमेंट लेने से पहले अपने डाक्‍टर से बात करनी चाहिए।























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Wednesday, May 25, 2016

कैसे कम करें आंखों की सूजन



आँखों में सूजन होने के अलग-अलग कारण हो सकते हैं- व्यस्त दिनचर्या, अच्छे खानपान की कमी, नींद पूरी न करना, नाईट ड्यूटी आदि, कुछ मामलों में यह जेनेटिक भी होता है। कारण कोई भी हो लेकिन आँखों की सूजन व्यक्तित्व और सुंदरता में कमी जरूर लाती है। यदि अकसर आपको यह समस्या होती है तो किसी चिकित्सक से परामर्श लें। इसके अलावा कोई अन्य कारण हो तो कुछ आसान घरेलू उपायों द्वारा आप इस समस्या से निजात पा सकते हैं-

आंखों की सूजन कम करने के टिप्स (Tips to remove eyes puffiness in Hindi)
विटामिन- ई युक्त तेल लगाएं (Use Vitamin- E rich Oil)
ठंडे पानी में विटामिन- ई युक्त तेल की कुछ बूंदें डालें और इस तेल में भीगी हुई रूई को करीब 20 मिनट तक अपनी बंद आंखों के उपर रखें। सूजन में आराम मिलेगा।

खीरे के गोल टुकड़ों से मिलेगा आंखों आराम (Slices of Cucumber)
खीरा आंखों के लिए बहुत अच्छा होता है। आंखों को ठंडक पहुंचाने के लिए खीरे के पतले और गोल टुकड़े 25 मिनट तक अपनी आंखों के ऊपर रखें।

बर्फ और चम्मच है ज्यादा असरदार (Ice- cubes & Spoons)
आइस क्यूब में ठंडे किये गए चम्मच को आँखों पर रखें जिससे आँख पूरी कवर हो जाये, इस प्रक्रिया को दोनों आँखों पर चम्मच के गर्म होने और सूजन के समाप्त होने तक दोहरायें। चम्मच को फ्रीजर में करीब एक घंटे तक रखकर भी प्रयोग किया जा सकता है।

त्वचा को टाईट रखेगा अंडे का सफेद भाग (Egg white will tighten your skin)
अंडे के सफेद भाग को एक ब्रश की सहायता से अपनी आंखों के आस-पास लगाएं। करीब 20 मिनट बाद साफ पानी से धो लें। यह नुस्खा त्वचा को टाईट करने में बहुत कारगर है।

चिल्ड टी बैग से मिलेगी जल्द राहत (Chilled tea bags for quick relief)
दो टी-बैग्स को पानी में भिगोकर फ्रिज में रख दें। दो या तीन मिनट बाद उसे फ्रिज से निकालकर 20-25 मिनट तक आंखों पर रखें और इसके बाद चेहरे को पानी से धो लें।

मेकअप भी है एक तरीका (Makeup is the solution too)
इन उपायों के अलावा आप मेकअप के जरिये तुरंत पफी-आईज से छुटकारा पा सकते हैं। अंडर-आईज पैचेज, कंसीलर, एंटी पफीनेस आई-क्रीम आदि प्रोडक्ट्स से भी आँखों की सूजन को दूर किया जा सकता है लेकिन ध्यान रखें अगर आँखों में किसी एलर्जी की वजह से सूजन है तो किसी भी ब्यूटी प्रोडक्ट का इस्तेमाल न करें और डॉक्टर से सलाह लें।




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Makeup Tips For Rainy Season





मेकअप टिप्स जो बारिश में भी रखें आपको ग्लैमरस (Makeup Tips For Rainy Season)

बरसात का मौसम यानी घर से बहार निकलते ही बारिश में भीगने का चांस। ऐसे में जो सबसे बड़ी उलझन होती है वो है पानी की फुहारों से मेकअप की परतों का उतारना। फैले हुए काजल और बहते हुये फाउंडेशन को देखकर कोई भी पता लगा सकता है की आपका चेहरा कितनी परतों में छिपा हुआ था।

यूँ भी बरसात का मौसम थोड़ा चिपचिपा होता है ऐसे में आप बारिश से बच भी जाएं तो भी मेकअप अगर सही तरीके से इस्तेमाल नहीं किया है तो आपका मेकअप अधिक पसीने से खराब हो सकता है और आपको शर्मिंदा होना पड़ सकता है।

एक्सपर्ट की मानें तो मेकअप के लिए सही प्रोडक्ट का चुनाव और करने का सही तरीका हो तो बारिश के मौसम में भी आप खिली खिली नज़र आ सकती हैं। आइये आपको बताते हैं एक्सपर्ट द्वारा सुझाये गये कुछ टिप्स।

बारिश के लिए मेकअप टिप्स (Makeup Tips for Rainy Season in Hindi)

1. क्लीनिंग (Cleansing)

सीजन कोई भी हो मेकअप की शुरुवात चेहरे की क्लीनिंग से ही होती है। अगर आपकी स्किन ऑयली (Oily Skin) है तो एस्ट्रिजेंट (Astringent) का इस्तेमाल करें। यदि ड्राई स्किन या नार्मल स्किन है तो टोनर का इस्तेमाल करें। चेहरा धोने के बाद तकरीबन 10 मिनट तक बर्फ का टुकड़ा चेहरे पर रगड़ें। इससे पसीने की ग्रन्थियां बंद हो जाती हैं और मेकअप ज्यादा देर टिकता है।

2. प्राइमर (Primer)

क्लीनिंग के बाद मेकअप की शुरूआत प्राइमर से करें। प्राइमर को चेहरे पर लगा कर दो से तीन मिनट के लिए छोड़ दें और उसके बाद अगला स्टेप करें। प्राइमर से चेहरे पर मेकअप ज्यादा देर तक टिका रहता है। अगर जरूरत हो तो कंसीलर (Concealer) का भी उपयोग किया जा सकता है।

3. फाउंडेशन (Foundation)

रेनी सीजन में क्रीम या लिक्विड फाउंडेशन का कम ही इस्तेमाल करें। लूज़ पाउडर फाउंडेशन या मिनरलाइज्ड फाउंडेशन लगाएं। फाउंडेशन की मात्रा बहुत कम होनी चाहिए जो कि सिर्फ चेहरे की ग्रीसिनेस छिपाने के लिए हो। फाउंडेशन की जगह टिंटेड मॉश्चराइज्ड भी इस्तेमाल कर के काम चलाया जा सकता है।

4. ब्लश (Blush)

बरसाती मौसम में पाउडर ब्लश का इस्तेमाल करें। कलर भी एकदम नेचुरल चुनें। शिमरी ब्लश भूल कर भी न लगाएं। यह चेहरे को चिपचिपी लुक देते हैं, साथ ही पानी के संपर्क में आने पर चेहरे से जल्दी बहने लगता है।

5. आईशैडो (Eyeshadow)

बरसाती मौसम में संभव हो तो ऑय शैडो न लगाएं। अगर लगाना जरुरी है तो पाउडर आईशैडो यूज़ करें। रंग भी एकदम नेचुरल होने चाहिए जिनमे पिंक, लैवेंडर और शैम्पेन, आदि रंग शामिल हैं।

6. ऑय लाइनर, काजल, मस्कारा (Eye Liner, Kohl, Mascara)

ध्यान रहे कि यह सारे प्रोडक्ट वाटर प्रूफ हों और लॉन्ग लास्टिंग हो। केवल काजल लगा कर भी आँखों को सुन्दर दिखाया जा सकता है, इसलिए संभव हो तो दिन के समय आय लाइनर को अवॉयड करें या ब्लैक की जगह भूरे (ब्राउन) ऑय लाइनर लगाएं।

7. लिपस्टिक (Lipstick)

ग्लॉस या क्रीम लिपस्टिक को अवॉयड करें। मैट लिपस्टिक का इस्तेमाल करें। मैट लिपस्टिक ज्यादा देर होंठो पर टिकेगी और बारिश में लुक भी खराब नही होगा। लिपस्टिक फैलने से आपकी लुक बेकार हो जाती है। इसलिए लिपस्टिक का विशेष ध्यान रखें

बरसात और हाइजिन (Hygiene in Rainy Season)

बरसात के मौसम मे हाइजिन का विशेष ध्यान रखें। मेकअप ब्रश हमेशा साफ़ करके रखें। उन्हें धोकर और पूरी तरह सुखाकर ही इस्तेमाल करें। ब्रश या मेकअप प्रोडक्ट रखने की जगह भी एकदम सूखी और मॉइस्चर फ्री होनी चाहिए। एक प्रोडक्ट का ब्रश दूसरे प्रोडक्ट में डालने से पहले भी ब्रश की सफाई करें। बरसात के मौसम में जहां तक संभव को मेकअप डायरेक्ट हाथ से लगाने से बचें। ब्रश, कॉटन, स्पंज और वाइप्स का प्रयोग करें।

यह भी रखें ध्यान (Common Makeup Tips for Rainy Season in Hindi)
मेकअप प्रोडक्ट वाटर प्रूफ हो।
क्रीमी या ग्लॉसी प्रोडक्ट इस्तेमाल न करें।
एकदम नेचुरल मेकअप करें। भारी परते लगाने से बचें।
आँखों पर सिर्फ काजल लगाएं (यदि शैडो और लाइनर जरुरी ना लगे)।
वाइप स्ट्रिप हमेशा साथ रखें जिससे जरुरत पड़ने पर चेहरा साफ़ किया जा सके।






















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सुंदरता के लिए भारतीय पारंपरिक टिप्स





रायल टच

आई मेकअप

सबसे पहले कॉपर शेड का आईशैडो लगाएं | आई मेकअप को गोल्डन इफेक्ट देने के लिए गोल्ड शेड का आईशैडो लगा लें | थिक ब्लैक कलर का आई लाइनर लगाएं | मस्कारा लगाकर आई मेकअप कंप्लीट करें |

लिप मेकअप

होंठों पर ऑरेंज शेड की लिपस्टिक लगा लें |

चीक मेकअप

सॉफ्ट पिंक ब्लशर से चीक बोन को हाईलाइट करें |

हेयर आर्ट

लो बन बनाकर बालों को पिन अप कर लें |

नेल आर्ट

ब्राइट ऑरेंज शेड की नेल पालिश लगाएं |
मिस ब्यूटीफुल

आई मेकअप

परफेक्ट आई मेकअप के लिए पलकों पर कॉपर और गोल्डन शेड का आईशैडो लगाकर स्मज कर लें | फिर ब्लैक आई लाइनर लगाएं और आखिर में मस्कारा लगाकर आई मेकअप को कंप्लीट लुक दें |

चीक मेकअप

चीक बोन को हाईलाइट करने के लिए सॉफ्ट पिंक शेड का ब्लश आन लगाएं |

लिप मेकअप

अट्रैक्टिव लुक के लिए डार्क पिंक शेड की लिपस्टिक लगा लें |

हेयर आर्ट

ट्रेडिशनल लुक के लिए बालों का साइड बन बना लें |

नेल आर्ट

ब्लैक कलर की नेलपालिश लगाकर अपनी पर्सनैलिटी को ग्लैमरस लुक दें |
देसी टच

आई मेकअप

स्मोकी आई मेकअप के लिए कॉपर शेड का आईशैडो लगाएं | फिर ब्लैक आई लाइनर का थिक कोट लगाएं | अब मस्कारा लगाकर आई मेकअप पूरा करें |

चीक मेकअप

सॉफ्ट पिंक शेड का ब्लशर लगाकर चिक बोन को हाईलाइट करें |

लिप मेकअप

होंठों पर डार्क मरून शेड की लिपस्टिक लगा लें |

हेयर आर्ट

बालों का फ्रंट साइड पफ बनाकर पीछे लो बन बना लें |

नेल आर्ट

डार्क रेड शेड का नेलपेंट लगाकर हाथों की खूबसूरती बढ़ाएं |
ड्रामा क्वीन

आई मेकअप

ड्रेमेटिक आई मेकअप के लिए कॉपर शेड का आईशैडो लगाएं | फिर ब्लैक आई लाइनर लगाएं और मस्कारा लगाकर आई मेकअप को कंप्लीट लुक दें |

चीक मेकअप

रोज़ी पिंक शेड का ब्लशर लगाकर चीक बोन को हाईलाइट करें |

लिप मेकअप

रेड शेड की मैट फिनिश वाली लिपस्टिक लगाकर लिप मेकअप पूरा करें |

हेयर आर्ट

स्टाइलिश लुक के लिए बालों को खुला छोड़ दें |

नेल आर्ट

ट्रेंडी लुक के लिए लिपस्टिक की तरह नेलपेंट भी रेड कलर की ही चुनें |
सिंपली गार्जियस

आई मेकअप

कॉपर व गोल्डन शेड का आईशैडो पलकों पर अप्लाई करें | फिर ब्लैक आईलाइनर और आखिर में मस्कारा लगाकर आई मेकअप पूरा करें |

चीक मेकअप

फेमिनिन लुक के लिए पिंक कलर का ब्लश आन लगाएं |

लिप मेकअप

लाइट पिंक शेड की ग्लासी लिपस्टिक लगाएं |

हेयर आर्ट

आगे के बालों को स्मॉल रोल्स में घुमाकर पिनअप कर लें और बैक साइड लूज़ बन बना लें |

नेल आर्ट

रेड कलर की नेल पॉलिश लगाएं |































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पाएं तैलीय बालों से छुटकारा


शैंपू


बालों में प्रतिदिन शैपू करें, इससे अतिरिक्त तेल साफ होगा | लेकिन यह जानना भी आवश्यक है कि शैपू की अधिक मात्रा तेल ग्रंथी को प्रोत्साहित करता है अधिक तेल बनाने के लिए | कम मात्रा में ही शैंपू लें |
कंडीशनिंग


बरसात में तैलीय बालों को कडीशनिंग करने से बचना चाहिए | कंडीशनर की जगह शैंपू करने के बाद एक मग पानी में आधे नीबू का रस मिला कर लगाएं | नीबूं से आपके बालों की चमक बरकरार रहेगी और यह डेंड्रफ से भी आपके बालों की सुरक्षा करेगा |



स्टाइलिंग प्रोडक्ट


इस मौसम में कोई भी स्टाइलिंग प्रोडक्ट या हेयर जैल का प्रयोग न करें, क्योंकि यह उत्पाद क्रीमी होते हैं | इन उत्पादओं का प्रयोग करने पर आपका लुक ऐसा दिखेगा जैसे अभी अभी आपने बालों में ऑयल मसाज लिया हो | इसके साथ ही यह बालों को अधिक तैलीय और चिपचिपा बनाएगा जिससे धूल और मिट्टी बालों की ओर आकर्षित होंगे |
स्वीमिंग


स्वीमिंग करने वाले यूं तो बालों में कैप पहन कर स्विम करते हैं और अक्सर इसके बाद शॉवर लेना जरुरी नहीं समझते | लेकिन तैलीय बालों पर स्वीमिंग पूल के कैमिकल मिले पानी का हानिकारक असर हो सकता है | इसलिए स्वीमिंग करने से पहले और बाद में सादे पानी से बालों को धो लें |
काम्ब



बालों में कंघी करना आवश्यक है इससे रक्त संचार में वृद्धि होती है | लेकिन बार बार कंघी करने से तेल ग्रंथी सक्रिय होकर अधिक तेल का उत्पाद करने लगती है | इसलिए तैलीय बालों वाले पुरुषों को विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि दिन भर में उन्हें सिर्फ दो बार कंघी करना चाहिए |

उर्पयुक्त बातों को अपनाकर आप भी अपने बालों की खूबसूरती और आकर्षण को बढ़ा सकते हैं तो क्यों न ऐसा करके व्यक्तित्व में चार चांद लगा लिया जाए |



















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Monday, May 23, 2016

गर्मियों के ये पांच खाद्य पदार्थ जो कुदरती तौर पर त्वचा को करें




डिटॉक्सीफिकेशन बहत जरुरी है क्योंकि हम एक ऐसी दुनिया में रह रहे हैं जो विषाक्त पदार्थों और रसायनों से भरी हुई है।और अपने अपने शरीर को डिटॉक्सीफाई करना सिर्फ इसलिए जरुरी नहीं है कि ये महत्वपूर्ण है बल्कि यह हमारे स्वास्थ्य के लिए बेहद नुक्सानदायक भी है।डिटॉक्सीफिकेशन शरीर से विषाक्त पदार्थों को नष्ट करने की प्रक्रिया है।




डिटॉक्सीफिकेशन सचमुच बीमारी के लक्षण और अपने जीवन को बदल सकते हैं। यह आपकी ऊर्जा को बढ़ा देता है, वजन घटाने के साथ मदद करता है अापके मन को साफ करता है, स्वस्थ बालों को बढ़ावा देता है और आपकी रंगत को साफ करने में मदद करता है।

लेकिन इसके लिए सही तकनीक को जानने के साथ ही सही खाद्य पदार्थों का चयन बेहद महत्वपूर्ण है।

तरबूज़:

गर्मियों में एक डिटॉक्सीफिकेशन के लिए नंबर एक भोजन के रूप में माना जाता है, तरबूज एंटीऑक्सीडेंट से युक्त मुक्त कणों से नुकसान के खिलाफ लड़ने के लिए बेहतर माना जाता है।तरबूज, जो अत्यंत क्षारीय के गठन शरीर में है, तरबूज में जो सिट्रुलाइन होता है जो अर्जीनाइन बनाने के लिए मदद करता है।यह भी पोटेशियम का एक अच्छा स्रोत है कि हमारे भोजन में सोडियम की उच्च मात्रा है जो अपने गुर्दे का समर्थन करता है और जब हमारी बाडी में सफाई का कार्य होता है।

खीरा:-

आवश्यक विटामिन से भरा हुआ खीरा जिसमें 95% पानी की मात्रा है कि आपके शरीर से विषाक्त पदार्थों को फ्लश करने में मदद करता है और साथ ही आप की बाडी को हाइड्रेटेड रखने में मदद करता है।

नींबू:-

नींबू का रस जोकि प्रचुर मात्रा में विटामिन सी और पोटेशियम, मैग्नीशियम और फास्फोरस जैसे खनिजों के साथ है। नींबू पित्त उत्पादन को प्रोत्साहित और गुर्दों को साफ करने में मदद करता है।नींबू का रस सुबह में गर्म पानी और शहद के साथ मिश्रित कर पीने से आंतों को साफ करने और शरीर से संचित विषाक्त पदार्थों को खत्म करने में मदद करता है।

हरी चाय:-

हरी चाय पीने हमेशा अच्छा है। और विशेष रूप से गर्मियों में इसे पीने के अतिरिक्त लाभ है-हरी चाय एंटीऑक्सीडेंट हानिकारक यूवी किरणों से बचाने के लिए सहायक है। साथ ही गर्मियों में धूप से हाइड्रेटेड रखने में मदद करता है।



पुदीने की पत्तियां:-

पुदीने का पानी सबसे ताज़ा गर्मियों का पेय पदार्थ है। एक अनोखी खुशबू, ठंडा सनसनी और अन्य औषधीय गुणों के साथ, पुदीना जिगर से पित्त के प्रवाह, पित्ताशय की थैली के लिए, छोटी आंत को बेहतर बनाता है।



















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तुतलाते हैं तो खाए आंवला, होगा चमत्कारी लाभ



आपने कई बच्चों को हकलाकर या तुतलाकर बोलते हुए देखा होगा। दरअसल, यह समस्या मोटी जीभ, हकलाने वाली की नकल करने और नाड़ियों में किसी प्रकार के दोष होने से हो सकती है। जब हम बोलते वक्त सही से अक्षरों को नहीं बोल पाते हैं, रुक-रुककर बोलते हैं तो यह तुतलाने या हकलाने का रोग कहलाता है।




कई लोगों की यह समस्या खुद-ब-खुद सही हो जाती है जबकि जिनकी पुरानी होती जाती है उनके लिए परेशानी का सबक बनती जाती है। डॉक्टरों के अनुसार, अगर कोई बच्चा बोलते वक्त हकलाता है, तो उसके लिए आंवला बहुत ही फायदेमंद हो सकता है। ऐसे बच्चों को कुछ दिनों तक आंवला चबाने के लिए देना चाहिए। दरअसल आंवला चबाने से जीभ पतली होने में मदद मिलती है और आवाज साफ निकलने लगती है। हकलाने की समस्या से निजात पाने के लिए अपने बच्चे को रोजाना कुछ दिनों तक आवंला चबाने के लिए दें। आंवले से आवाज साफ होती है और हकलाने की समस्या धीरे-धीरे कम होती जाती है। हकलाने और तुतलाने पर कच्चे, पके हरे आंवले को कई बार चूस सकते हैं।




























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Saturday, May 21, 2016

मुंहासे को झट से दूर करने वाला फेस पैक

मुंहासों का मूल कारण रोम कूपों का बंद होना है। कई बार मृत त्वचा कोशिकाएं, बैक्टीरिया आदि के कारण भी रोम कूप बंद हो जाते हैं जिसके कारण मुंहासों की समस्या हो सकती है। कभी कभी तनाव या हार्मोन्स में परिवर्तन होने के कारण भी मुंहासों की समस्या हो सकती है।  अपनी त्वचा को मुंहासे और दाग धब्बों से सुरक्षित रखने के लिए इन्हें आने से रोकना बहुत महत्वपूर्ण है। प्राकृतिक पदार्थों की सहायता से इन मुंहासों को आने से रोका जा सकता है। ये पदार्थ सस्ते, सुरक्षित हैं तथा बाज़ार में मिलने वाली क्रीम्स से कहीं अधिक विश्वसनीय हैं। आज बोल्ड स्काय में हम आपको एक ऐसे डीआईवाय मास्क के बारे में बताएँगे जिससे मुंहासों को आने से रोका जा सकता है। दुल्‍हनों के लिये चेहरे से दाग धब्‍बे हटाने के प्राकृतिक टिप्‍स इस डीआईवाय मास्क के लिए आपको विटामिन सी पाउडर या संतरे के छिलकों के पाउडर, शहद और लेवेंडर ऑइल की आवश्यकता होगी। विटामिन सी त्वचा के पी एच संतुलन को बनाये रखता है। शहद में एंटीसेप्टिक, एंटीऑक्सीडेंट और एंटीबैक्टीरियल गुण होता है। लेवेंडर ऑइल त्वचा के नीचे से मुंहासों को आने से रोकता है। तो आइए मुंहासों को रोकने वाले इस मास्क को बनाने के लिए आवश्यक सामग्री और इसके उपयोग की विधि के बारे में पढ़े। आवश्यक सामग्री: 1 टी स्पून विटामिन सी पाउडर या संतरे के छिलके का पाउडर  1 टी स्पून कच्चा शहद  लेवेंडर ऑइल की 2-3 बूँदें  कैसे उपयोग करें: सभी पदार्थों को अच्छी तरह मिलाएं। इसे हलके हाथों से चेहरे तथा गर्दन पर लगायें। इसे 15-20 मिनिट तक लगा रहने दें। इसके बाद गुनगुने पानी से धो डालें। इस उपचार को सप्ताह में दो बार करें



















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गुलाबजल और चंदन दिलाए छुटकारा वाइटहेड से

गुलाबजल और चंदन दिलाए छुटकारा वाइटहेड से










क्या आपके चेहरे पर सफ़ेद दाने हैं जो आपकी सुंदरता को कम करते हैं? यदि ऊपर पूछे गए प्रश्न का उत्तर हाँ है तो इस लेख को आगे पढ़ें| आपकी नाक, ठोड़ी या पूरे चेहरे पर जो सफ़ेद दाने होते हैं उन्हें व्हाइटहैड्स कहते हैं| ये मुंहासों के ही एक प्रकार है जो बंद रोम छिद्रों के कारण होते हैं।

वे लोग जिनकी त्वचा तैलीय होती है उनमें अतिरिक्त सीबम का स्त्राव होता है जिसके कारण त्वचा की सतह के नीचे तेल बनने लगता है तथा चेहरे के विभिन्न भागों पर यह सफ़ेद दानों के रूप में दिखाई देता है।






आज बोल्डस्काय में हम आपको एक आसान फेस मास्क के बारे में बताएँगे जो आपके चेहरे से व्हाइटहैड्स दूर करेगा तथा आपके चेहरे को चिकना बनाएगा। अपने रसोईघर से केवल दो पदार्थ लें, चंदन का पाउडर तथा गुलाब जल, इसे मिलाकर फेस मास्क बनाये और उपयोग करें।

चंदन पाउडर एस्ट्रिजेंट की तरह कार्य करता है और अतिरिक्त तेल को सोख लेता है। जब इसे गुलाब जल के साथ मिलाया जाता है तो यह त्वचा की मृत कोशिकाओं को निकालने का काम करता है। तो आइए इस फेस मास्क को बनाने के लिए आवश्यक सामग्री और उपयोग के निर्देश के बारे में जानें।




आवश्यक सामग्री:

2 टीस्पून चंदन का पाउडर
4 टीस्पून गुलाब जल उपयोग के निर्देश: दोनों पदार्थों को कटोरे में मिलाएं। आँखें और मुंह छोड़कर इसे बाकी के चेहरे पर लगायें| 5-10 मिनिट तक मालिश करें। इसे 20-25 मिनिट तक लगा रहने दें| फिर ठंडे पानी से धो डालें। अच्छे परिणामों के लिए इस उपचार को सप्ताह में दो बार दोहरायें।

















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Friday, May 20, 2016

गले के दर्द के लिये 5 आसान आयुर्वेदिक उपचार



गले के दर्द के लिये 5 आसान आयुर्वेदिक उपचार

आयुर्वेद के अनुसार मानव शरीर तीन दोषों से मिलकर बना है। ये तीन दोष हैं, कफ़, पित्त और वात। इनकी तुलना वायु, पृथ्वी, अग्नि, पानी और आकाश से की गई है। प्रत्येक व्यक्ति में किसी एक दोष की प्रधानता होती है जो उसके व्यक्तित्व को दर्शाती है परन्तु आयुर्वेद के सिद्धांत के अनुसार किसी भी बीमारी का कारण इन तीन दोषों में गंभीर असंतुलन होना है। READ: गले में दर्द हो तो ना खाएं यह चीजे़ आईये कुछ ऐसे आयुर्वेदिक उपचारों के बारे में जानें जो आपको गले के दर्द को दूर करने में मदद करते हैं। आयुर्वेद के सिद्धांत के अनुसार गले के दर्द को दूर करने के लिए आपको अपने आहार और जीवनशैली में आवश्यक परिवर्तन करने होंगे। गले के दर्द को दूर करने के लिए आपको ठंडे, खट्टे और मसालेदार पदार्थों से परहेज़ करना चाहिए। READ: टॉन्सिलाइटिस के दर्द से राहत दिलाए ये आहार विभिन्न प्रकार के मसाले जैसे अदरक, मेथी और लहसुन भी गले की खराश को दूर करने में सहायक होते हैं। आज हम आपको प्राचीन औषधि प्रणाली की 5 औषधियों को बनाने की विधि बताएँगे जो गले में होने वाले दर्द को दूर करने में सहायक होगी।

इलायची: क्या आप जानते हैं कि आयुर्वेद में इलायची का प्रयोग गले के दर्द और टॉनसिल्स के उपचार में किया जाता है? इलायची को पानी में भिगोकर गरारे करने से गले की खराश दूर होती





मेथी: मेथी का उपयोग गले के दर्द दूर करने के लिए भी किया जाता है। मेथी के बीजों को कुछ समय के लिए पानी में उबालें। इसे एक निश्चित तापमान तक ठंडा करें, छानें तथा इस पानी से गरारे करें।

आम की छाल: क्या आप जानते हैं कि आम के पेड़ की छाल का उपयोग गले की खराश के उपचार में किया जाता है। आयुर्वेद के अनुसार आम की छाल गले की खराश को दूर करने का प्रभावी उपचार है। इसे पीसते समय जो तरल पदार्थ निकलता है उसे पानी में मिलाकर उसका उपयोग गरारे करने के लिए किया जा सकता है या उसे प्रभावित जगह पर लगाया जा सकता है।

त्रिफला: आयुर्वेद के अनुसार त्रिफला तीन या अधिक जडी बूटियों का मिश्रण है जो इसके पाचन में लाभ, डिटॉक्सीफाइंग गुण और प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के गुणों के लिए जाना जाता है। यह गले से संबंधित अन्य समस्याओं के उपचार में सहायक होता है। त्रिफला को गर्म पानी में मिलाएं। दिन में कई बार इस पानी से गरारे करें और आप देखेंगे कि आपकी स्थिति में तुरंत ही सुधार होने लगता है।

त्रिफला: आयुर्वेद के अनुसार त्रिफला तीन या अधिक जडी बूटियों का मिश्रण है जो इसके पाचन में लाभ, डिटॉक्सीफाइंग गुण और प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के गुणों के लिए जाना जाता है। यह गले से संबंधित अन्य समस्याओं के उपचार में सहायक होता है। त्रिफला को गर्म पानी में मिलाएं। दिन में कई बार इस पानी से गरारे करें और आप देखेंगे कि आपकी स्थिति में तुरंत ही सुधार होने लगता है।























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Wednesday, May 18, 2016

Piles



बवासीर (Piles) एक असाध्य रोग है। इसे हेमोरहोयड्स (Haemorrhoids), पाइल्स या मूलव्याधि भी कहते हैं। बवासीर को आयुर्वेद में अर्श यानि दीर्घकालीन प्राणघातक बीमारी कहा जाता है। बवासीर में आंत के अंतिम हिस्से या मलाशय (गुदा) की भीतरी दीवार में रक्त की धमनी और शिराओं में सूजन हो जाती है और वो तनकर फैल जाती है। मल त्याग के वक्त जोर लगाने या दवाब देने से या कब्ज के कड़े मल से रगड़ खाने से रक्त की नसों में दरार पड़ जाती है और नतीजा उसमें से खून का स्राव होने लगता है।

बवासीर में मलद्वार के पास रक्त की शिराएं फूल जाती है। हेमोरॉयडल रक्त शिराएं गुदा और रेक्टम के नीचे स्थित होती है। हेमोरॉयडल रक्त शिराओं में सूजन होने से जब यह फूल जाती है तो मल को निकलने में काफी परेशानी होती है। हेमोरॉयडल रक्त शिराएं की दीवार इतनी तन जाती है कि मल निकलने के दौरान दर्द होने लगता है और मलद्वार में खुजलाहट होने लगती है।

बवासीर (Bawasir) जब काफी गंभीर हो जाती है तो गुदा द्वार, नाभि, लिंग, अंड-कोष, चेहरा, हाथ-पैर में सूजन आ जाती है। बवासीर के मरीज को खांसी, बुखार, बेहोशी, उल्टी, खाने में अरुचि, छाती में दर्द, अधिक रक्त स्राव, कब्जियत आदि की शिकायत होने लगती है। मल द्वार पक कर उसमें पीले रंग का फोड़ा हो जाता है। असहनीय दर्द और पेट में ज्यादा गैस बनने से पूरा शरीर शिथिल हो जाता है।



बवासीर दो प्रकार का होता है- एक आंतरिक या खूनी बवासीर और दूसरा बाहरी या बादी बवासीर।

आंतरिक या खूनी बवासीर (Internal Haemorrhoids)
खूनी बवासीर में रेक्टम (Rectum) के अन्दर अर्श होता है जिसे बाहर से देखा और अनुभव नहीं किया जा सकता है। यह म्युकस मेम्ब्रेन (Mucous Membrane) से ढका होता है। ख़ूनी बवासीर में ज्यादा तकलीफ नहीं होती है, केवल मल के रास्ते से खून आता है। इसके अंदर मस्सा होता है जो बाद में बाहर आने लगता है। शौच के बाद खुद ही अंदर चला जाता है।

मस्सों से पीड़ित मरीजों को दर्द, घाव, खुजली, जलन, सूजन और गर्मी की शिकायत रहती हैं। प्रसव के दौरान जब कोई स्त्री बच्चे को जन्म देते समय अधिक ज़ोर लगाती है तब उसे भी खूनी बवासीर होने की संभावना रहती है। इस रोग से पीड़ित अधिकतर मरीज कब्ज से पीड़ित रहते हैं। इस बवासीर के कारण मलत्याग करते समय रोगी को बहुत तेज दर्द होता है और मस्सों से खून बहने लगता है। यह बहुत ही गंभीर रोग है क्योंकि इसमें दर्द तो होती ही है साथ में शरीर का खून भी व्यर्थ निकल जाता है।



बाहरी या बादी बवासीर(External Haemorrhoids)
बादी बवासीर में पेट अक्सर खराब रहता है और कब्ज बना रहता है। पेट में एसिडिटी बनती रहती है। इसमें जलन, दर्द, खुजली, शरीर मै बेचैनी, काम में मन न लगना जैसे लक्षण होते हैं। शौच कड़ा होने पर इसमें कभी-कभार खून भी आता है। इसमें मस्सा अंदर होने की वजह से मलद्वार का रास्ता छोटा पड़ता है और दबाव से रास्ता फट जाता है और वहां घाव हो जाता है। इसे मेडिकल की भाषा में फिशर (Fissure) कहा जाता है। इसमें तेज जलन और दर्द होती है। बवासीर बहुत पुराना होने पर भगंदर हो जाता है। जिसे अंग़जी में फिस्टुला (Fistula) कहते हैं।






सामान्य उपचार





देखभाल और उपचार (Treatments and Tips to Prevent Piles )

बवासीर के प्रारंभिक अवस्था घरेलू इलाज और नुस्खे ही सबसे कारगर माना गया है। इससे मरीज रोग की तकलीफों पर काफी हद तक काबू पा सकता है। मसलन-
सबसे पहले कब्ज को दूर कर मल त्याग को सामान्य और नियमित करना आवश्यक है। इसके लिये तरल पदार्थों, हरी सब्जियों एवं फलों का बहुतायात में सेवन करें। बादी बवासीर (Haemorrhoids) के मरीज तली हुई चीज़ें, मिर्च-मसालों युक्त भोजन न करें।
रात में सोते समय एक गिलास पानी में इसबगोल की भूसी के दो चम्मच डालकर पीने से भी लाभ होता है।
गुदा के भीतर रात में सोने से पहले और सुबह मल त्याग के पूर्व मलहम लगाना भी मल निकास को सुगम करता है।
गुदा के बाहर लटके और सूजे हुए मस्सों पर ग्लिसरीन और मैग्नेशियम सल्फेट के मिश्रण का लेप लगाकर पट्टी बांधने से भी काफी आराम मिलता है और फायदा होता है।
मस्सों को हटाने के लिए भी कई विधियां उपलब्ध है। मस्सों में इंजेक्शन द्वारा ऐसी दवा का प्रवेश किया जाता है जिससे मस्से सूख जाते हैं।
मस्सों पर एक विशेष उपकरण द्वारा रबर के छल्ले चढ़ा दिए जाते हैं, जो मस्सों का रक्त प्रवाह रोककर उन्हें सुखाकर निकाल देते हैं।
एक अन्य उपकरण द्वारा मस्सों को बर्फ़ में परिवर्तित कर नष्ट किया जाता है।
सर्जरी द्वारा भी मस्सों को काटकर निकाल दिया जाता है।



बवासीर का घरेलू इलाज (Remedies of Piles in Hindi)
बवासीर (Piles) के मरीज को सबसे पहले 2 दिन तक रसाहार चीज़ों का सेवन करके उपवास रखना चाहिए। इसके बाद 2 सप्ताह तक बिना पके हुआ भोजन का सेवन करके उपवास रखना चाहिए।
मस्सों की सूजन बढ़ गई हो या फिर मस्सों से ख़ून अधिक निकल रहा है तो मिट्टी की पट्टी को बर्फ़ से ठंडा करके फिर इसको मस्सों पर 10 मिनट तक रखकर इस पर गर्म सेंक देना चाहिए।
बवासीर रोग को ठीक करने के लिए कुछ उपयोगी आसन है जैसे- नाड़ीशोधन, कपालभाति, भुजांगासन, प्राणायाम, पवनमुक्तासन, शलभासन, सुप्तवज्रासन, धनुरासन, शवासन, सर्वांगासन, मत्स्यासन, हलासन, चक्रासन आदि।




बवासीर के लिए घरेलू उपाय Home Remedies for Piles
मूली का नियमित सेवन बवासीर को ठीक कर देता है।
रात को सोते समय केले खाने चाहिए इससे रोगी को बहुत अधिक लाभ मिलता है।
पालक, बथुआ, पत्ता गोभी, चौलाई, सोया, काली जीरी के पत्ते का साग खाना चाहिए।
रोगी व्यक्ति को सुबह तथा शाम के समय 2 भिगोई हुई अंजीर खानी चाहिए और इसका पानी पीना चाहिए।
त्रिफला का चूर्ण लेना चाहिए। ऐसा कुछ दिनों तक करने से बवासीर रोग जल्दी ही ठीक हो जाता है।
2 चम्मच तिल चबाकर ठंडे पानी के साथ प्रतिदिन सेवन करने से बवासीर कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।
रोगी व्यक्ति को अपने भोजन में चुकन्दर, फूल गोभी और हरी सब्जियों का बहुत अधिक उपयोग करना चाहिए।
हरी सब्जियों में परवल, पपीता, भिंडी, केला का फूल, मूली, गाजर, शलजम, करेला, तुरई खाना चाहिए।
गुड़ में बेलगिरी मिलाकर खाने से रोगी व्यक्ति को बहुत अधिक लाभ मिलता है और बवासीर रोग ठीक हो जाता है।
पका पपीता, पका बेल, सेब, नाशपाती, अंगूर, तरबूज, मौसमी फल, किशमिश, छुआरा, मुनक्कात, अंजीर, नारियल, संतरा, आम, अनार खाना बवासीर में फायदेमंद होता है।
मस्सों पर सरसों का तेल लगाना चाहिए, फिर इसके बाद अपने पेड़ू पर मिट्टी की पट्टी करनी चाहिए और इसके बाद एनिमा लेना चाहिए तथा मस्सों पर मिट्टी का गोला रखना चाहिए।
रात को 100 ग्राम किशमिश पानी में भिगो दें और इसे सुबह के समय में इसे उसी पानी में इसे मसल दें। इस पानी को रोजाना सेवन करने से कुछ ही दिनों में बवासीर रोग ठीक हो जाता है।
नींबू को चीरकर उस पर चार ग्राम कत्था पीसकर बुरक दें और उसे रात में छत पर रख दें। सुबह दोनों टुकड़ों को चूस लें, यह खूनी बवासीर की उत्तम दवा है।
चोकर समेत आटे की रोटी, गेहूं का दलिया, हाथ कुटा- पुराना चावल, सोठी चावल का भात, चना और उसका सत्तू, मूंग, कुलथी, मोठ की दाल, छाछ का नियमित सेवन करना चाहिए।
















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घमौरियां


घमौरियों को अंग्रेजी में प्रिकली हीट (Prickly Heat) कहते हैं। गर्मियों के मौसम में घमौरियां होना आम बात है। गर्मी के मौसम में शरीर से पसीना अधिक मात्रा में बहता है। यदि समय रहते इस पसीने को साफ़ ना किया जाए तो यह शरीर की त्वचा में ही सूख जाता है जिसके कारण पसीने की ग्रंथियां बंद हो जाती हैं और शरीर में घमौरी होने लगती हैं।



घमौरियों के विषय में अधिक जानकारी (Details of Prickly Heat in Hindi)

वैज्ञानिक भाषा में घमौरी (Ghamori) को मिलिएरिया रूब्रा कहा जाता है। यह एक प्रकार का चर्मरोग होता है। बरसात के मौसम में भी अधिकतर लोगों को घमौरी की शिकायत होती है। घमौरी व्यक्ति के शरीर पर होने वाली छोटी व लाल फुंसियां और दाने (Heat Rash) हैं जिनमें अक्सर खुजली होती रहती है। कई बार पेट में कब्ज रहने के कारण भी शरीर पर घमौरी उभर सकती हैं।

घमौरी अक्सर छाती, बगल, हाथों और पैरों पर निकलती हैं। यह रोग किसी भी व्यक्ति को लग सकता है। गर्म शहरों में रहने वाले लोग इसका ज्यादा शिकार होते हैं। नवजात शिशुओं में घमौरी (Prickly Heat In Babies) अधिक निकलती है क्योंकि उन्हें पसीना अधिक आता है इसलिए उनमें बहुत सावधानी रखने की जरूरत होती है।

घमौरी के दौरान शरीर में खुजली, हल्की सूजन और चुभन महसूस होने लगती है। घमौरी के दाने धूप के सीधे संपर्क में आने से बढ़ जाते हैं। आमतौर पर घमौरी कुछ दिनों में अपने आप सही हो जाती है लेकिन कुछ लोगों में यह हफ्तों और महीनों तक के लिए हो सकती है। इसलिए एक हफ्ते तक घमौरी के ठीक ना होने पर डॉक्टर से जरूर परामर्श लेना चाहिए।

घमौरी (Prickly Heat) के कारण लोगों में थकावट (Heat Exhaustion) और धूप में चिड़चिड़ाहट की शिकायत भी होती है। घमौरी के कारण लू लगना का खतरा भी पैदा हो सकता है।

घमौरियां भी कई प्रकार की होती हैं जैसे मिलिएरिया क्रिस्टलाइन (Miliaria Crystallina), मिलिएरिया रूब्रा (Miliaria Rubra) और मिलिएरिया प्रॉफंडा (Miliaria Profunda)। मिलिएरिया प्रॉफुंडा में सबसे अधिक खतरा रहता है और इसे वाइल्डफायर (Wildfire Rash) भी कहते हैं।






सामान्य उपचार





घमौरियों से बचाव का सबसे बेहतर उपाय होता है गर्मी से बचकर रहना। इसके अलावा घमौरियों (Ghamoriyan) से बचाव के कुछ अहम उपाय निम्न हैं:



घमौरियों से बचाव (Treatment of Prickly Heat Remedies)
सिंथेटिक फैब्रिक से बने वस्त्रों को ना पहनें।
सूती और ढीले ढाले कपड़े पहनें।
खूब पानी पिएं और नहाएं।
बाहर से घर लौटने के कुछ देर बाद स्नान करें।
शरीर के हिस्सों को ताज़ा हवा लगने दें।
मसालेदार भोजन से बचें। सादा भोजन ही खाएं।
बारिश के पानी से स्नान करने से शरीर पर निकली फुंसियां और दानें दूर होते हैं।
रोजाना सुबह नीम की चार-पांच पत्तियां चबाएं।
शरीर पर मुल्तानी मिट्टी का लेप लगाएं।
नीम की पत्तियों को पानी में उबालकर इस पानी से स्नान करें।
नारियल के तेल में कपूर मिलाकर इस तेल से पूरे शरीर की मालिश करें।
कैलामाइन लोशन का प्रयोग करें।
गीले शरीर पर पाऊडर ना लगाएं। जरूरत से ज्यादा पाऊडर का प्रयोग करने से भी बचें।




र्मियों में घमौरियों की समस्या आम है। ज्यादा पसीना आने या गर्मी में रहने पर बड़ों, बच्चों, यहां तक कि नवजातों (Infants) में भी घमौरी की समस्या हो जाती है। घमौरी होने पर छोटे-छोटे चुभने वाले दानें पीठ, गर्दन तथा शरीर के अन्य हिस्सों पर निकल आते हैं।

कई बार बैक्टीरियल इंफेक्शन (Bacterial Infection) और शरीर का वजन ज्यादा होने से भी घमौरी निकलने की समस्या होती रहती है। यूं तो मौसम में बदलाव होते ही घमौरी की समस्या खुद ब खुद ठीक हो जाती है लेकिन कई दफा समस्या इतनी बढ़ जाती है कि मौसम में बदलाव होने तक का समय काटना भी मुश्किल होता है। ऐसे में कुछ घरेलू उपचारों से घमौरियों से निजात संभव है।

घमौरियों से राहत के लिए घरेलू नुस्ख़े (Home Remedies for Prickley Heat)

ओटमील (Oatmeal)

घमौरियों से निजात के लिए ओटमील बहुत बढ़िया नुस्खा है। ओटमील से घमौरियों में होने वाली जलन (inflammation), चुभन और खुजली (itching) से राहत मिलती है। उपचार के लिए ठंडे पानी से भरे हुए टब में एक कप ओटमील डालें। जब तक पानी दूधिया रंग हो तब तक इंतजार करें और इस पानी में तकरीबन आधा घंटा बैठें। इस उपाय को हर रोज दो बार करें।

ठंडा उपचार (Cold Compress)

घमौरी प्रभावित स्थान पर ठंडी सिकाई करने से भी तुरंत आराम मिलता है। बर्फ के कुछ टुकड़ों को कपड़े में लपेटकर प्रभावित स्थान पर सिकाई करें। लगातार तकरीबन 10 मिनट तक ऐसा करें। हर चार से छह घंटे पर ऐसा करें। इससे घमौरियां ठीक हो जाएंगी।

चंदन का पाउडर (Sandalwood Powder)

चंदन के पाउडर की ठंडक भी घमौरियों से निजात दिलाने में प्रभावी है। उपचार के लिए चंदन के पाउडर में पानी मिलाकर, लेप बनाएं और प्रभावित स्थान पर लगाएं। इसके अलावा पाउडर की तरह चंदन पाउडर को घमौरियों पर छिड़का भी जा सकता है।

बेकिंग पाउडर (Baking Powder)

बेकिंग पाउडर भी घमौरियों से राहत देने का अच्छा उपाय है। यह मृत त्वचा को हटाकर, गंदगी को साफ करता है जो कि खुजली और जलन का कारण होते हैं। उपचार के लिए एक कप ठंडे पानी में एक चम्मच बेकिंग सोडा मिलाकर उसमें एक साफ कपड़ा भिगाकर निचोड़ लें। इस कपड़े को प्रभावित स्थान पर तकरीबन 10 मिनट तक रखें। एक हफ्ते तक हर रोज 5 से 6 बार ऐसा करें।

मुल्तानी मिट्टी (Fuller’s Earth)

मुल्तानी मिट्टी भी घमौरी से निजात दिलाने का एक अच्छा घरेलू नुस्खा है। मुल्तानी मिट्टी घमौरी की जलन से निजात दिलाती है और खुजली भी मिटाती है। उपचार के लिए 5 चम्मच मुल्तानी मिट्टी में गुलाब जल मिलाकर लेप बनाएं और इस लेप को प्रभावित स्थान पर लगाएं। इस उपाय को प्रतिदिन एक बार करें।

एलोवेरा (Aloevera)

एलोवेरा भी घमौरी से निजात के लिए बेहद अच्छा स्त्रोत है। एलोवेरा के जाते पत्तों का गूदा लेकर प्रभावित स्थान पर लगाएं। तकरीबन 20 मिनट लगा रहने दें और उसके बाद धो दें। प्रतिदिन दो बार ऐसा करने से घमौरियां ठीक हो जाएंगी।

बेसन (Gram Flour)

बेसन शरीर का तेल सोख लेता है जिससे घमौरी के दाने जल्दी सूख जाते हैं। यह मृत त्वचा को भी साफ करता है और जलन से राहत देता है। उपचार के लिए बेसन की कुछ मात्रा में पानी मिलाकर लेप बनाएं। इस लेप को प्रभावित स्थान पर 10 से 15 मिनट के लिए लगाकर छोड़ दें। इस उपाय को हर रोज एक बार करें। एक सप्ताह में घमोरियां ठीक हो जाएंगी।

कच्चे आम (Raw Mango)

कच्चा आम शरीर की गर्मी को ठंडा करने में बेहद प्रभावशाली हैं। ऐसे में कच्चे आम का पना (एक प्रकार का पेय) बनाकर पीने से गर्मी में राहत मिलती है। पना बनाने के लिए कच्चे आम को उबालकर उसका गूदा अलग करें और ठंडे पानी में मिला लें। इस पानी में स्वादानुसार चीनी, काला नमक और भुना जीरा मिलाएं। इसे हर रोज दो बार पीएं।

खीरा (Cucumber)

खीरे में शरीर को ठंडा रखने का गुण होते हैं जो कि घमौरी से भी बचाते हैं। उपचार के लिए खीरे के पतले-पतले टुकड़े काटकर नींबू मिले हुए ठंडे पानी में कुछ देर भिगाकर रखें। इसके बाद इन टुकड़ों को प्रभावित स्थान पर कुछ देर रखें। ऐसा करने से भी घमौरियां जल्दी ठीक हो जाती हैं और खुजली तथा जलन से भी राहत मिलती है।
















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Tuesday, May 17, 2016

तैलीय त्वचा के लिए आसान टिप्स



आमतौर पर त्वचा चार तरह की होती है- नॉर्मल, ड्राय, ऑइली और सेंसेटिव। ऑइली स्किन (Oily Skin) का मतलब है आपकी स्किन में लिपिड लेवल यानि वसा की मात्रा ज्यादा होना। आपकी स्किन किस टाइप की है, यह तीन फैक्टर पर निर्भर होता है- पानी, लिपिड लेवल और संवेदनशीलता। ऑइली स्किन अकसर हार्मोनल बदलाव की वजह से होती है, इसका सम्बन्ध लाइफस्टाइल से भी है। ऑइली स्किन चमकदार, मोटी और बेजान होती है। इस तरह की स्किन वाले पुरुष और महिलाओं की आंख के नीचे काले धब्बे आने का खतरा रहता है। ऑइली स्किन में पोर्स (Pores) यानि त्वचा में पाए जाने वाले छिद्र बड़े-बड़े होते हैं और सैबेकियस ग्लैंड (Sebaceous Glands), ज्यादा सक्रिय होते हैं। नतीजा ऐसी स्किन ऑइली हो जाती है।

क्यों होती है ऑइली स्किन की समस्या (Reasons for Oily Skin)

माहवारी के दौरान हार्मोनल बदलाव (Hormonal changes during menstruation)
हर महीने मासिक धर्म के दौरान महिलाओं के शरीर में हुए हार्मोनल बदलाव से तैलीय ग्रंथि ज्यादा सक्रिय हो जाती है। इस दौरान निकले एंड्रोजेन हार्मोन (Androgen Hormone) की वजह से त्वचा में ज्यादा मात्रा में तेल निकलने लगता है, जिससे त्वचा के छिद्र भी बंद हो जाते हैं।

तनाव से भी बढ़ती है ऑइली स्किन की समस्या (Stress also increases the problem of oily skin)
टेंशन ज्यादा लेने से हार्मोनल संतुलन बिगड़ता है। एक शोध के अनुसार तनाव के दौरान शरीर से कॉर्टिसोल हार्मोन (Cortisol Hormone) का रिसाव होता है जिस वजह से त्वचा तैलीय हो जाती है।

गर्भनिरोधक गोलियों से भी होती है स्किन ऑइली (Contraceptive pills also make skin oily)
आपके लाइफस्टाइल का भी स्किन की सेहत से सीधा सम्बन्ध है। अगर आप बर्थ कंट्रोल के लिए गर्भनिरोधक (Contraceptive) या फिर यौन शक्ति बढ़ाने के लिए दवाइयां लेते हैं तो यह आपके शरीर में हार्मोनल लेवल को बढ़ाता है, जो त्वचा के ऑइली होने का कारण बनता है।

आनुवांशिकता भी है वजह (Heredity also makes skin oily)
शोध में पाया गया है कि ऑइली स्किन का सम्बन्ध जीन (genes) से भी है। अगर आपके माता-पिता की स्किन ऑइली है तो संभव है आपकी स्किन भी ऑइली होगी क्योंकि ऐसा देखा गया है कि जिन लोगों की स्किन में सैबेकियस ग्लैंड (Sebaceous Glands) सक्रिय रहती है, उनके बच्चों की त्वचा में भी ये ग्रंथि ज्यादा सक्रिय रहती है।

और भी हैं कई कारण
डाइट
प्रसव
कॉस्मेटिक्स
गर्मी और उमस

ऑइली स्किन की देखभाल के लिये केयर टिप्स (Tips to care Oily skin)

क्लींजिंग (Cleansing)- चेहरे के पोर्स से तेल और गंदगी को साफ करने के लिये क्लींजर (Cleanser) का प्रयोग करें। उसके बाद अपने चेहरे को हल्के गुनगुने पानी से धो लें।

दिन में दो तीन बार चेहरा धोएं। हफ्ते में दो बार फेस स्क्रब करें। इससे चेहरे की स्किन को सांस लेने में मदद मिलेगी और चेहरे पर ब्लैकहेड्स (Blackheads) भी नहीं होंगे।

टोनिंग (Toning)- आपका दूसरा स्टेप होना चाहिए, चेहरे की टोनिंग करना। चेहरे पर टोनर लगाइये जिससे स्किन के पोर्स बंद हो जाएं, नहीं तो खुले पोर्स में गंदगी फिर से जम सकती है। टोनर के रूप में गुलाब जल भी लगाया जा सकता है।

मॉइश्चराइजर (Moisturizer)- ऑइली स्किन तैलीय होती है मगर इसका यह मतलब नहीं कि आप उस पर मॉइश्चराइजर ना लगाएं। आपको वॉटर बेस वाला मॉश्चराइजर लगाना चाहिए।

फेस मास्क (Face Mask)- फेस मास्क लगाने से चेहरे की डेड स्किन निकल जाती है और चेहरा खिल जाता है। बाजार से फेस मास्क खरीदने से बेहतर है कि आप घरेलू चीजों जैसे नींबू, ओट्स, अंडा, दूध, पपीता आदि से फेस मास्क तैयार करें।

सेहतमंद आहार खाएं (Eat Healthy Food)- ऑइली फूड और बहुत ज्यादा फैट वाला आहार ना खाएं। आपको खूब फल और सब्जियां खानी चाहिए और लिक्विड डाइट में ग्रीन टी, जूस और पानी लेना चाहिए।

और भी हैं कई स्मार्ट टिप्स (General Care Tips)
• कैलामाइन पैक में विटामिन सी टोनर मिलाकर पेस्ट बना लें। इसे हफ्ते में तीन बार चेहरे पर लगाएं। 20 मिनट बाद चेहरा धो लें।
• मुल्तानी मिट्टी, चंदन पाउडर और नीम पाउडर को बराबर मात्रा में गुलाबजल के साथ मिलाकर हफ्ते में दो बार चेहरे पर लगाएं। बीस मिनट बाद चेहरा धो लें।
• 10 से 12 गिलास पानी पिएं। मिर्च-मसाले व फास्ट फूड आदि का सेवन कम से कम करें। सुबह खाली पेट एक आंवला खाएं।
• चाहे जितनी गर्मी हो लेकिन अपने होठों पर लिप बाम लगाना बिल्कुल भी ना भूलें।
• पाउडर न ही लगाएं तो बेहतर है, पाउडर लगाने से आपको ज्यादा पसीना आता है
• अगर चेहरा ऑइली है तो अपने चेहरे से गंदगी को हटाने के लिये स्क्रब करना ना भूलें
• लाइट आई शैडो का इस्तेमाल करें। कोई ऐसा शेड सलेक्ट करें जो आपकी स्किन टोन से मैच खाता हो।
• वॉटरप्रूफ मस्कारा लगाएं। वॉटरप्रूफ मस्कारा पूरे दिन आंखों पर टिका रहता है।




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बालों की लम्बाई बढ़ाने के तरीके




बाल प्रोटीन से बने होते हैं। काले, घने और लंबे बालों के लिए बालों को पोषण मिलना जरुरी है। बालों के पोषण से मतलब है बालों की जड़ों को प्रोटीन मिलते रहना। बाल की जड़ यानि स्कैल्प जितनी मजबूत होगी बाल उतनी तेजी से बढ़ेंगे।

बालों का बढ़ना बालों के जड़ यानि स्कैल्प या हेयर फॉलिकल से शुरु होता है। बालों की जड़ों को पोषण तेल और शैम्पू से तो मिलता ही है साथ ही हेल्दी फूड और साफ-सफाई भी बालों की ग्रोथ में अहम भूमिका निभाती है। घने और लंबे बालों का कोई शार्टकट फार्मूला नहीं है। हालांकि बाल हर महीने औसतन आधा इंच बढ़ते हैं।

बालों की बढ़ने की गति आपकी सेहत, खान-पान की आदत, बालों की देखभाल और आनुवांशिक कारणों से प्रभावित होती है। आइए जानते हैं उन उपायों के बारे में जिसे आजमाने से बाल घने और काले होने के साथ तेजी से बढ़ते हैं।

हेयर ग्रोथ के 10 टॉप टिप्स

1. हेल्दी डाइट
लंबे और घने बालों के लिए डाईट में प्रोटीन, विटामिन्स और मिनरल्स जरुरी है। अपनी डाईट में वैसे फूड को शामिल करें जिसमें विटामिन ए, बी, सी, ई के साथ-साथ आयरन, जिंक, मैग्नेशियम और सेलेनियम जैसे तत्वों की अच्छी मात्रा मौजूद हो।

2. अरंडी तेल से मसाज
अरंडी तेल (Castor Oil) में विटामिन ई के साथ बालों की ग्रोथ के लिए जरुरी औमेगा फैटी-9 एसिड रहता है। इस तेल से बालों के स्कैल्प की मसाज करने से बाल कुदरती तरीके से लंबे और घने होते हैं। वैसे अरंडी का तेल काफी गाढ़ा होता है, अगर इसके साथ बराबर मात्रा में नारियल तेल, जैतून का तेल और बादाम का तेल मिला लिया जाए तो यह और असरदार हो जाता है। सभी तेलों को मिलाकर 5 मिनट तक बालों के स्कैल्प की मसाज करें। चालीस मिनट बाद माइल्ड शैम्पू से बालों को धो लें। ऐसा नियमित करने से जल्द ही बालों की लंबाई में असर दिखने लगेगा।

3. स्कैल्प की मसाज
मसाज करने से बालों की जड़ स्कैल्प तक रक्त संचार तेज होता है और इससे बालों के बढ़ने की गति में तेजी आती है। इसके अलावा हफ्ते में एक दिन गुनगुने तेल और हेयर मास्क से बालों की डीप कंडीशनिंग करने से भी काफी असर होता है। बालों में गुनगना तेल या कंडीशनर लगाएं। ऊंगलियों से पांच मिनट तक स्कैल्प की मसाज करें।

4. बाल को नीचे की और झुकाएं
बालों को लंबा करने के लिए यह सबसे पॉपुलर ट्रिक है। आमतौर पर लड़कियां और बाल धोने के बाद बाल सुखाने के लिए बालों को नीचे करती है। दो से पांच मिनट तक सर झुका कर बालों को नीचे झुकाने से बालों के बढ़ने की गति तेज होती है। ऐसा माना जाता है कि ऐसा करने से बालों के जड़ से रक्त संचरण बढ़ते हुए बालों की शिराओं तक पहुंचती है। नतीजा बालों की लंबाई बढ़ती है।

5. तनाव मुक्त रहें
बालों के झड़ने- गिरने और टूटने की बड़ी वजह तनाव है। यह माना जाता है कि तनाव की वजह से बालों के बढ़ने का जो सामान्य चक्र होता है वह रुक जाता है। तनाव बढ़ते ही बालों का चक्र टेलोजेन फेज में पहुंच जाता है़ जिसमें बाल झड़ने और गिरने की बीमारी शुरु हो जाती है। तनाव को कम करने का सबसे आसान उपाय है ध्यान। ध्यान लगाने और अच्छी नींद लेने से बालों के बढ़ने के लिए उत्तरदायी हार्मोन के स्राव की गति तेज हो जाती है।

6. बालों में अंडे का मास्क लगाएं
बालों के बढ़ने में अंडे का इस्तेमाल काफी असरदार है। अंडे में प्रोटीन के साथ वो सारे जरुरी तत्व जैसे- आइरन, सल्फर, फॉस्फोरस, जिंक और सेलेनियम पाए जाते हैं जिससे बालों को पोषण मिलता है और बाल लंबे होते हैं।

महीने में एक बार बालों पर अंडे का मास्क लगा सकते हैं। इसके लिए एक अंडे को फोड़ लें। उसमें चार चम्मच अंगूर के बीज का तेल और लेवेंडर ऑयल की कुछ बूंदे मिला लें। अब इसे बालों में जड़ तक लेप लें। अंडे और तेल की इस लेप को आधे घंटे तक छोड़ दें। आधे घंटे के बाद बालों को शैंपू से धो लें।
इसके अलावा दो अंडे की जर्दी में दो चम्मच जैतून का तेल मिला लें। इससे स्कैल्प की मसाज करें। लेप को 20 मिनट तक छोड़ दें। बीस मिनट के बाद बालों को ठंडे पानी से धो लें और फिर शैंपू कर लें।

7. बालों को हर्ब्स से धोएं
मेंहदी, नीम और ग्रीन टी समेत ऐसे कई हर्ब्स हैं जिसे बालों पर लगाने से बाल घने और लंबे होते हैं। मेंहदी इसमें सबसे ज्यादा असरदार है, क्योंकि यह बालों की जड़ों यानि स्कैल्प को पोषण देता है। इससे बालों में चमक आती है।

ग्रीन टी में पाए जाने वाले तत्व पॉलीफेनोल्स बालों के बढ़ने में अहम भूमिका निभाते हैं। ध्यान रहे कि इन हर्ब्स का लेप बालों में शैंपू और कंडीशनिंग करने के बाद लगाएं। हर्बल टी पीने से भी बाल लंबे होते हैं।

8. विटामिन और हर्बल सप्लीमेंट अलग से लें
संतुलित डाइट लेने के बाद भी शरीर में कुछ जरुरी तत्वों की कमी रह जाती है। इन जरुरी तत्वों से शरीर ही नहीं त्वचा और बालों को भी पोषण मिलता है। बालों की ग्रोथ के लिए डाइट के अलावा आप फॉलिक एसिड, विटामिन्स, बायोटिन, गिनसेंग, फिश ऑयल सप्लीमेंट के तौर पर ले सकते हैं।

9. एलोवेरा से बालों को पोषण दें
एलोवेरा बालों को बढ़ने में मदद करता है। एलोवेरा जेल लगाने से बालों का झड़ना और गिरना कम होता है। यह डैंड्रफ तो कम करता ही है, साथ ही बालों में शाइनिंग भी लाता है। एलोवेरा जेल में थोड़ा नींबू का रस मिलाकर बालों में लगाएं। इसे 20 मिनट तक सूखने के लिए छोड़ दें। बीस मिनट के बाद बालों में शैंपू कर लें। इसे हफ्ते में एक या दो बार आजमा सकते हैं। एलोवेरा जेल में नारियल तेल भी मिला सकते हैं। इसके अलावा एलोवेरा जूस पीना भी बालों के सेहत के लिए असरदार साबित होगा।

10. साइड इफेक्ट्स की संभावनाएं
अगर आपको कोई मेडिकल प्रॉब्लम यानि कोई बीमारी है तो आप बालों की लंबाई बढ़ाने के कितने भी प्रयास कर लें, बालों में ग्रोथ नहीं होगी। जिसे थाइरॉयड की शिकायत है, हार्मोनल असंतुलन हो, पुरानी कोई लाइलाज बीमारी हो या फिर कोई संक्रमण हो तो उसके बालों में ग्रोथ नहीं होता है। अगर आप गर्भ निरोधक या स्टेरॉइड की गोली ले रहे हैं तो आपको बाल के झड़ने और गिरने की शिकायत हो सकती है।

बालों के लिए जरुरी खान-पान
दूध
पनीर
योगर्ट
चिकन
अंडा
साबुत अनाज
पालक
अंगूर
एवाकाडो
ब्रोकली
सेलमन
पत्ता गोभी
ओट्स
अखरोट
मछली
ताजे फल और हरी सब्जियों के जूस



















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Monday, May 16, 2016

आखिर क्यों सो जाते हैं हमारे पैर




पैर का सोना, हममें से लगभग सभी ने कभी न कभी जरूर अनुभव किया होगा। पैर का सोना बड़ा ही कष्टदायक होता है क्योंकि ऐसे में फिर आपका कहीं मन नहीं लगता। लेकिन क्‍या आप पैर के सोने के असली कारण के बारे में जानते हैं, अगर नहीं तो यह आर्टिकल आपके लिए मददगार हो सकता है।


पैर सोने के कारण

कुछ लोगों का मानना है कि पैरे‍स्‍थेसिया में पैरों के सोने से उसमें भारी, सुस्‍त, झुनझुनाहट और अजीब सी पिन या सुई चुभने जैसा महसूस होता है- ऐसा पैरों में पर्याप्‍त रूप से ब्‍लड के न पहुंचने के कारण होता है। वास्‍तव में, आपके पैर तंत्रिकाओं (नर्वस) के कारण सोते हैं। नर्वस आपके शरीर में चलने वाले छोटे तारों की तरह होते है। नर्वस आगे ओर पीछे आपके ब्रेन और शरीर के कई हिस्‍सों के बीच संदेश ले जाने का काम करता है।
अगर आप लंबे समय के लिए अपने पैर के सहारे बैठते हैं तो उस हिस्‍से की नर्वस पर दबाव पड़ता हैं। ऐसा शरीर के अन्‍य भागों में भी हो सकता है। लोग समय-समय पर पैर, हाथ और बाजू ऐसा अनुभव करते हैं। यानी शरीर का कोई अंग यदि किसी दबाव में ज्यादा समय तक रहता है, तो वह सुन्न हो जाता है। वस्तुतः यह दबाव हाथ या पैर की नर्वस पर पड़ता है।
ये नर्वस कोशीय फाइबर से बनी होती है और प्रत्येक एक कोशीय फाइबर अलग-अलग संवेदनाओं को मस्तिष्क तक पहुंचाने का कार्य करता है। इन फाइबरों की मोटाई भी कम-ज्यादा होती है। इसका कारण माइलिन नामक श्वेत रंग के पदार्थ द्वारा बनाई गई झिल्ली है। इन पर दबाव पड़ने से ब्रेन तक नसों द्वारा पर्याप्त मात्रा में आक्सीजन और रक्त का संचरण नहीं हो पाता है और ब्रेन तक उस अंग के बारे में पहुंचने वाली जानकारी रक्त और आक्सीजन के अभाव में अवरूद्ध हो जाती है। इस कारण वहां संवेदना महसूस नहीं हो पाती और वह अंग सो हो जाता है। जब उस अंग से दबाव हट जाता है तो रक्त और आक्सीजन का संचरण नियमित हो जाने से वह अंग पुनः संवेदनशील हो जाता है।

प्रत्येक व्यक्ति को समय-समय पर इन भावनाओं का अनुभव होता है, और ये पूरी तरह से सामान्य हैं। इससे आपके शरीर को चोट नहीं पहुंचती, लेकिन यकीनन कुछ समय के लिए आपको अजीब महसूस हो सकता है, जब तक कि आपका ब्रेन और शरीर दोबारा बातचीत शुरू नहीं कर देता।





















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नारियल पानी से चेहरा धोने पर होते हैं ये फायदे



नारियल पानी से चेहरा धोने के फायदे



लगातार बढ़ती गर्मी का सबसे ज्यादा असर हमारी त्‍वचा पर पड़ता है, इसलिए बदलते मौसम के साथ अपनी त्वचा का खास ख्याल रखना जरूरी होती है, वर्ना त्वचा रूखी और बेजान हो जाती है। इस मौसम में चेहरे की ताजगी बरकरार रखने के लिए त्‍वचा विशेषज्ञ ठंडे पानी से चेहरा धोने की सलाह देते हैं। दिन में 3-4 बार चेहरा धोने से ताजगी के साथ-साथ त्‍वचा की नमी भी नहीं खोती। लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि गर्मियों में नारियल पानी से चेहरा धोना नार्मल ठंडे पानी की तुलना में कहीं अधिक फायदेमंद होता है। नारियल पानी से चेहरा धोने से जहां एक ओर चेहरे की नमी बनी रहती है, वहीं दूसरी तरफ त्‍वचा से जुड़ी समस्‍याओं के होने का खतरा भी कम हो जाता है। इसके अलावा नारियल में पानी में मौजूद एंटी-बैक्‍टीरियल तत्‍व त्‍वचा को विभिन्‍न प्रकार से इंफेक्‍शन से सुरक्षा देने में मददगार होता है।



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डार्क सर्कल में उपयोगी



डार्क सर्कल के कारण चेहरे की खूबसूरती कम होने लगती है। अगर आप भी डार्क सर्कल से परेशान हैं तो नारियल पानी इस समस्‍या को बहुत ही आसानी से दूर कर सकता है। समस्‍या होने पर कॉटन को नारियल पानी में डुबोकर आंखों के आस-पास लगाये। रोजाना ऐसा करने से कुछ ही दिनों में आपके डार्क सर्कल धीरे-धीरे दूर हो जाएंगे।


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कील-मुंहासे दूर करें



गर्मियों में ऑयली स्किन वालों को खासतौर पर कील-मुंहासों की शिकायत रहती है। ऐसे में नारियल पानी का इस्‍तेमाल बहुत फायदेमंद होता है। अगर आपके चेहरे पर मुंहासे हो गये हैं तो नारियल पानी से चेहरा साफ करें। इससे आपको कील-मुंहासों की समस्‍या से निजात मिलेगी।



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टैनिंग में लाभकारी



गर्मियों में अधिकतर लोगों को टैनिंग की समस्‍या से जूझना पड़ता है। अगर आप भी टैनिंग की समस्‍या से बचना और झुलसी हुई त्‍वचा को निखारने और हमेशा तरोताजा बनाये रखना चाहते हैं तो नारियल के पानी से चेहरे को साफ करें। यदि आप रोजाना अपना चेहरा नारियल पानी से नहीं धो सकते हैं तो कॉटन की मदद से नारियल के पानी से अपना चेहरा साफ करें।


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दाग-धब्बे करें दूर



नारियल के पानी से चेहरे के दाग-धब्‍बे और झांइयों के लिए बहुत उपयोगी होता है। अगर आपको दाग-धब्‍बे और झांइयों की शिकायत हैं तो नारियल पानी से चेहरा धोना आपके लिए बहुत फायदेमंद होगी क्‍योंकि इससे चेहरे के दाग आसानी से दूर हो जाएंगे और आपके चेहरे पर प्राकृतिक चमक भी बनी रहेगी।



6
त्‍वचा की रंगत निखारें



लगभग हर कोई निखरी त्‍वचा की चाहत रखता है। यदि आप तरो-ताजा और निखरी त्‍वचा के साथ गोरापन भी चाहते हैं, तो नारियल के पानी से अपने चेहरे को साफ करें।























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Saturday, May 14, 2016

1 हफ्ते में 10 साल छोटी दिखने के लिये अपनाएं ये घरेलू उपचार




आजकल जवान दिखने के लिए बहुत से लोग आजकल एंटी एजिंग कॉस्मेटिक सर्जरी, फेस लिफ्ट, बोटॉक्स आदि का सहारा ले रहे हैं। हालाँकि ये सभी प्रक्रियाएं बहुत महंगी और कष्टदायक होती हैं। क्या आप जानते हैं कि एक ऐसा प्राचीन उपाय है जिसके द्वारा आप केवल एक सप्ताह में ही आपकी उम्र 10 साल कम दिखने लगेगी? जी हाँ, और सबसे अच्छी बात यह है कि इसे आपके रसोईघर में उपलब्ध चीज़ों से ही बनाया जा सकता है।


एंटी एजिंग स्किन मास्क बनाने की विधि




आवश्यक सामग्री: दूध – 2 टेबल स्पून पका हुआ चांवल – 3 टेबल स्पून शहद – 1 टेबल स्पून

 कैसे बनायें: दिए गए पदार्थों की उपरोक्त मात्रा को एक कटोरे में मिलाएं। जिस बर्तन में चांवल पकाया है उससे बर्तन में उसमें पानी मिलाएं। सभी पदार्थों को अच्छी तरह मिलाकर पेस्ट बनायें। इस मिश्रण को अपनी त्वचा पर लगायें। इसे 15 मिनिट तक लगा रहने दें। फिर त्वचा को ठन्डे पानी से धो डालें। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि दूध में पोषक तत्व और विटामिन्स तथा प्रोटीन्स प्रचुर मात्रा में होते हैं जो हमारे शरीर की कोशिकाओं को अंदर से पोषण प्रदान करते हैं तथा कोशिकाओं के समय से पूर्व होने वाले क्षरण को दूर रखते हैं। इसके अलावा दूध में त्वचा को अंदर से पुनर्जीवित करने की क्षमता होती है तथा यह आपकी त्वचा को जवान और चमकदार बनाता है। चांवल में एंटीऑक्सीडेंट्स और पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में होते हैं जो ऐजिंग (बुढापा) के लक्षणों जैसे झुर्रियों और फाइन लाइंस को दूर करते हैं। चांवल शरीर में कोलेजन के उत्पादन को बढ़ाते हैं और त्वचा के

लचीलेपन में भी सुधार लाते हैं जिससे आपको जवां त्वचा मिलती है। शहद एक प्राकृतिक हाइड्रेटिंग कारक है जो आपकी त्वचा को नमी प्रदान करता है तथा त्वचा की शुष्कता और झुर्रियों को दूर रखता है।







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काली मिर्च की चाय के फायदे


काली मिर्च की चाय के ये फायदे नहीं जानते होंगे आप








काली मिर्च मसालों की रानी मानी जाती है, जिससे ना केवल खाने का स्‍वाद बदलता है बल्‍कि स्‍वास्‍थ्‍य भी ठीक रहता है। काली मिर्च स्‍वाद में तीखी और पित्‍ता पैदा करने वाली होती है। अगर इससे बनी चाय पी जाए तो, आपको मौसमी बीमारियों जैसे, सर्दी, जुखाम, खांसी और बुखार से छुटकारा मिल सकता है। यही नहीं काली मिर्च की चाय पीने से पेट हमेशा ठीक रहता है।




READ: काली मिर्च के जादुई गुण आज हम आपको काली मिर्च से बनने वाली चाय बनाना सिखाएंगे और उसके फायदों के बारे में भी चर्चा करेंगे। लेकिन उससे पहले ये जान लें कि काली मिर्च को दिनभर में कितना खाना चाहिये, जिससे वह नुकसान ना करे। दिन में आप 500 एमजी से ले कर 1 ग्राम तक की काली मिर्च का सेवन कर सकते हैं। काली मिर्च की चाय बनाने की विधि- सबसे पहले एक कप पानी उबालिये। उसमें 1/2 चम्‍मच काली मिर्च पावडर डालिये। आप चाहें तो इसमें अदरक का रस भी मिक्‍स कर सकते हैं। इसे 2-3 मिनट उबालिये। फिर छान लीजिये। इसमें शहद मिला कर दिन में दो बार पीजिये। काली मिर्च चाय पीने का फायदा इसमें एंटीऑक्‍सीडेंट होता है जो फ्री रैडिकल्‍स से बचाता है। सर्दी, खांसी, जुखाम, बुखार और सांस संबंधित बीमारी से आराम दिलाए। पेट के लिये बढियां, गैस और डायरिया से बचाए। लीवर में बाइल जूस बनाने का काम तेज करे साथ ही मुंह में लार बनाए जिससे खाना आराम से हजम हो जाता है। सावधानी - वे लोग जिनके शरीर में पित्‍त हर वक्‍त बढ़ा रहता है, उन्‍हें काली मिर्च की चाय का सेवन काफी सोच समझ कर करना चाहिये क्‍योंकि यह शरीर में पित्‍ता पैदा करने का काम करती है। जिन लागों को अल्‍सर, शरीर के अंगों में सूजन, स्‍किन रैश और पित्‍त की समस्‍या होती है, उन्‍हें यह चाय कम पीनी चाहिये, नहीं तो दोष बढ सकता है।






















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