Monday, June 1, 2015

"रेशेदार भोजन" है स्वस्थ रहने के लिए अति आवश्यकता


"रेशेदार भोजन" है स्वस्थ रहने के लिए अति आवश्यकता 

हमें स्वस्थ रहने के लिए रेशेदार भोजन की आवश्यकता है। मांस, मैदा व रस में रेशा नहीं होता। हमें रिफाइन्ड फ़ूड की जगह रफ़ फ़ूड की जरूरत है। मोगर के स्थान पर छिलके वाली दाल, मैदे की जगह मोटा आटा, तले - भूने भोजन के स्थान पर अंकुरित एवं उबले हुए खाद्य पदार्थो का उपयोग, स्वस्थ रहने के लिए साबुत खाना श्रेयस्कर है। गाजर, सेव, नारंगी आदि को खाने से रेशायुक्त रस पेट में आता है। 
रेशे की कमी से बड़ी आँतों में कैंसर, कब्ज, बवासीर तथा फिशर होने की सम्भावना बढ़ जाती हैं। शाकाहारियों में मांसाहारियों की अपेक्षा आँतों के रोग कम होते हैं। मांसाहारियों में आँतों के रोगी अधिक पाये जाते हैं। 
फल सब्जियों का रस पीने से रेशा निकल जाता है। रस पीने से शरीर में कैलोरी की मात्रा बढ़ जाती है। इससे मोटापा बढ़ता है। रस के स्थान पर फल, सब्जी चबा - चबा कर खाना अधिक लाभदायक है। रेशायुक्त भोजन करने से बहुत - सी बीमारियों से बचाव हो जाता है। 
स्वस्थ रहना चाहते हैं तो भोजन नियमित, संतुलित एवं स्वास्थ्यवर्धक हो तथा रेशेदार भोजन को प्राथमिकता दीजिये।



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