Monday, June 1, 2015

"सहजन की फली" करे एक नहीं सौ बिमारियों का इलाज़

"सहजन की फली" करे एक नहीं सौ बिमारियों का इलाज़ 

सहजन (ड्रमस्टिक्स) या मुनगा जड़ से लेकर फूल और पत्तियों तक सेहत का खजाना है। सहजन के ताजे फूल हर्बल टॉनिक है। इसका वनस्पति नाम मोरिंगा ओलिफेरा है। इसकी पत्ती में कई ऐसे पोषक तत्व पाए गए हैं, जो स्वास्थ्य की दृष्टि से काफी लाभदायक हैं। फिलीपीन्स, मैक्सिको, श्रीलंका, मलेशिया आदि देशों में भी सहजन का उपयोग बहुत अधिक किया जाता है।


दक्षिण भारत में व्यंजनों में इसका उपयोग खूब किया जाता है। सहजन के बीज से तेल निकाला जाता है और छाल पत्ती, गोंद, जड़ आदि से आयुर्वेदिक दवाएं तैयार की जाती हैं। आयुर्वेद में 300 रोगों का सहजन से उपचार बताया गया है। इसलिए आज हम आपको परिचित करवाने जा रहे हैं। सहजन की कुछ खास उपयोगिताओं व इसके गुणों से ......


1. सहजन में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, कैल्शियम, पोटेशियम, आयरन, मैग्नीशियम, विटामिन-ए, सी और बी कॉम्पलैक्स प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। एक अध्ययन के अनुसार इसमें दूध की तुलना में 4 गुना कैल्शियम और दुगना प्रोटीन पाया जाता है। प्राकृतिक गुणों से भरपूर सहजन इतने औषधीय गुणों से भरपूर है कि इसकी फली के अचार और चटनी कई बीमारियों से मुक्ति दिलाने में सहायक हैं। यह सिर्फ खाने वाले के लिए ही नहीं, बल्कि जिस जमीन पर यह लगाया जाता है, उसके लिए भी लाभप्रद है।
2. सहजन पाचन से जुड़ी समस्याओं को खत्म कर देता है। हैजा, दस्त, पेचिश, पीलिया और कोलाइटिस होने पर इसके पत्ते का ताजा रस, एक चम्मच शहद, और नारियल पानी मिलाकर लें, यह एक उत्कृष्ट हर्बल दवाई है।



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3. सहजन के पत्ते का पाउडर कैंसर और दिल के रोगियों के लिए एक बेहतरीन दवा है। यह ब्लडप्रेशर कंट्रोल करता है। इसका प्रयोग पेट में अल्सर के इलाज के लिए किया जा सकता है। यह पेट की दीवार के अस्तर की मरम्मत करने में सक्षम है। यह शरीर की ऊर्जा का स्तर बढ़ा देता है। 

4. इसके बीज में पानी को साफ करने का गुण होता है। बीज को चूर्ण के रूप में पीस कर पानी में मिलाया जाता है। पानी में घुल कर यह एक प्रभावी नेचुरल क्लैरीफिकेशन एजेंट बन जाता है। यह पानी को बैक्टीरिया रहित बनाता है ।

5. कुपोषण पीड़ित लोगों के आहार के रूप में सहजन का प्रयोग करने की सलाह दी गई है। एक से तीन साल के बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए यह वरदान माना गया है। सहजन की जड़ का अजवाइन, हींग और सौंठ के साथ काढ़ा बनाकर पीने का प्रचलन है। इसका काढ़ा साइटिका रोग के साथ ही, पैरों के दर्द व सूजन में भी बहुत लाभकारी है।
6. इसका जूस प्रसूता स्त्री को देने की सलाह दी जाती है। इससे डिलवरी में होने वाली समस्या से राहत मिलती है और डिलवरी के बाद भी मां को तकलीफ कम होती है। सहजन की पत्तियों के साथ ही सजहन का फल विटामिन्स से भरा होता है। सहजन में विटामिन ए होता है, इसीलिए यह सौन्दर्यवर्धक के रूप में काम करता है। साथ ही, यह आंखों के लिए भी लाभदायक होता है।

"अरबी" दूर करे कई रोगों का इलाज़

"अरबी" दूर करे कई रोगों का इलाज़ 

अरबी एक ऐसी सब्जी है, जो स्वाद के साथ ही शरीर को ताकत भी देती है। यह मुख्य रूप से गर्मी और वर्षा ऋतु में होती है। अरबी अनेक किस्म की होती हैं- राजाल, धावालु, काली-अलु, मंडले-अलु, गिमालु और रामालु। इन सबमें काली अरबी उत्तम है। कुछ अरबी में बड़े और कुछ में छोटे कंद लगते हैं। इसे अलग-अलग तरह से बनाया जाता है। आदिवासी भी इस पौधे की पत्तियों और कंदों का तमाम रोगों के इलाज के लिए इस्तेमाल करते हैं।

अरबी
1. अरबी की पत्तियों के डंठल को तोड़कर अलग कर लें। पत्तियों को जलाकर राख को नारियल तेल में मिलाकर फोड़े-फुंसियों पर लगाने से लाभ होता है।


2. इसके पत्तों में बेसन लगाकर भजिए बनाकर खाएं। ये भजिए जोड़ों के दर्द में कारगर दवा का काम करते हैं।


3. अरबी के पत्ते डंठल के साथ लेकर पानी में उबाल लें। इस पानी में थोड़ा घी मिलाकर तीन दिनों तक दो बार लें। गैस की समस्या में फायदा होगा।


4. अरबी के पत्तों का रस तीन दिन तक पीने से पेशाब की जलन मिट जाती है।


5. अरबी की सब्जी खाने से प्रसूता स्त्रियों के स्तनों में दूध बढ़ता है।

6. अरबी के पत्तों की सब्जी बनाकर खाने से एसिडिटी दूर होती है।

7. अरबी की पत्तियों के डंठल को तोड़कर अलग कर लें। पत्तियों को जलाकर राख को नारियल तेल में मिलाकर फोड़े-फुंसियों पर लगाने से लाभ होता है।


8. इसके पत्तों में बेसन लगाकर भजिए बनाकर खाएं। ये भजिए जोड़ों के दर्द में कारगर दवा का काम करते हैं।


9. अरबी के पत्ते डंठल के साथ लेकर पानी में उबाल लें। इस पानी में थोड़ा घी मिलाकर तीन दिनों तक दो बार लें। गैस की समस्या में फायदा होगा।


10. अरबी के पत्तों का रस तीन दिन तक पीने से पेशाब की जलन मिट जाती है।


11. अरबी की सब्जी खाने से प्रसूता स्त्रियों के स्तनों में दूध बढ़ता है।


12. अरबी के पत्तों की सब्जी बनाकर खाने से एसिडिटी दूर होती है।
13. अरबी का कंद शक्ति और वीर्यवर्धक होता है। इसकी पत्तियां शरीर को मजबूत बनाती हैं। अच्छी तरह से उबले कंदों में नमक मिलाकर खाने से नपुंसकता दूर होती है।


14. दिल से संबंधित रोग होने पर अरबी की सब्जी रोजाना खाने से लाभ होता है।


15. अरबी को पीसकर कुछ दिनों तक नियमित रूप से सिर पर लगाने से बाल गिरने की समस्या से छुटकारा मिल जाता है।


सरसों का तेल करे दमा और जोड़ों के दर्द में असर


"सरसों का तेल" करे दमा और जोड़ों के दर्द में असर 

दमा : नमक और सरसों का तेल गरम कर के सीने पर मलें और फिर सेक करें। इससे दमा में लाभ होता है। 

छाले : स्नान करने के बाद नाभि पर नित्य सरसों का तेल लगाएं। 

बेहोशी : कभी - कभी स्त्री को गर्भपात से, पुरुष को चोट लगने से, अधिक रक्त निकलने से बेहोशी आ जाती है। 
नेत्र फ़टे रह जाते हैं , होश नहीं रहता। कंठ में कफ की गुड़गुड़ाहट होती है। ऐसी स्थिति में पहले सिर, फिर बदन पर सरसों के तेल की मालिश करें, घी पिलायें, इससे होश आ जाता है। 

जोड़ों का दर्द : सरसों के तेल की मालिश करके सेक करने से जोड़ों के दर्द में लाभ होता है। 

बिवाइयां : सरसों के गरम तेल से सेक करने से बिवाइयां ठीक हो जाती हैं। 

सौंदर्यवर्धक : रात को चार चम्मच सरसों पानी में भिगों दें। पानी इतना ही डालें कि सरसों सोख ले। फिर इसमें इतनी ही चिरौंजी डालकर दूध में पीसें। इसको बदन पर मलें। सौंदर्य बढ़ेगा।

सिर दर्द : सरसों का तेल नाक में लगाकर या कुछ बूँदें सूंघने से सिर दर्द बंद हो जाता है। 

मच्छर : सौ ग्राम सरसों के तेल में दस ग्राम कपूर डालकर हिलाएं। इसकी शरीर पर मालिश करें। मच्छर नहीं खाएंगे। 

"मुनक्का" है कमजोरी का रामबाण इलाज़

"मुनक्का" है कमजोरी का रामबाण इलाज़ 

मोटापा बढ़ाना : 15 मुनक्का नित्य रात को  सोते समय खा कर पानी पीकर सोएं। एक - दो महीने में ही सारी दुर्बलता दूर होकर शरीर का वजन बढ़ेगा, शरीर मोटा हो जाएगा। 

शक्तिवर्धक : सर्दी के मौसम में बीस मुनक्का 250 ग्राम दूध में उबाल कर खाएं और दूध पी जाएँ। यह प्रोग्राम पुरे सर्दी के मौसम में करें। 

पीलिया : मुनक्का भिगोकर पानी में घोल कर पीयें। 

टाइफाइड : बीमार को भोजन में अन्न नहीं दें तथा पूर्ण आराम करने की सलाह दें। फलों का रस, पपीता, मुनक्का खाने को दें।

दस्त : बीज सहित दस मुनक्का पीस कर पानी में घोल कर सुबह, शाम दो बार पिलाने से दस्त बंद हो जाएंगे। 

आधे सिर का दर्द : यदि आधे सिर में दर्द सूर्योदय से बढ़ता हो और सूरज छिपने पर ढलने के साथ कम होता हो , तो पांच मुनक्का लें। इनके बीज निकाल कर इनमें राई के बराबर कपूर भर कर गोली की तरह बना लें। प्रातः सूरज उदय होने से पहले उठकर हर बीस मिनट से एक - एक मुनक्का पानी से निगल जाएँ। आधे सिर का दर्द ठीक हो जाएगा। 



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"मेहंदी" दिलाये ठंडक और करे बिवाइयां दूर


"मेहंदी" दिलाये ठंडक और करे बिवाइयां दूर 

मेहंदी का प्रयोग गर्मी में ठंडक पहुंचाने के लिए किया जाता है। कई वृद्ध अपने श्वेत केश में मेहंदी लगाकर सुनहरे बाल बनाने का भी शौक रखते हैं, इससे दिमाग में ठंडक बनी  रहती है। मेहंदी स्वास्थ की दृष्टि उपयोगी है। यदि आप सिर दर्द से परेशान हैं, तो मेहंदी की पत्तियों को पीसकर उनका सिर पर लेप करें। कुछ समय में राहत महसूस होगी। 

कटे हुए घाव पर मेहंदी लगाने से आश्चर्यजनक लाभ होता है। कुछ ही दिनों में  पूरा भर जाएगा। 

खुरदरापन : यदि आप हाथों में खुरदरापन महसूस करते हैं तो पीसी हुई मेहंदी में नीम्बू का रस मिलाकर  लगाने से हाथ मुलायम होते हैं। पैरों का खुरदरापन दूर करने के लिए मेहंदी का लेप पैरों पर करें। सूख जाने पर मेहंदी हटा दें और सरसों का तेल पैरों पर लगा लें। 

बिवाइयां : बरसात व सर्दी में अक्सर पैरों में बिवाइयां फट जाती है, बिवाई फट जाने पर नियमित रूप से  उन पर मेहंदी पैर ठीक हो जाते हैं। बिवाई फट जाने पर कुछ दिनों तक 10 ग्राम मेहंदी के पत्ते, एक गिलास पानी में उबाल कर काढ़ा बनाकर पिलाना लाभदायक होता है।

काले दाग : शरीर पर कई बार काले दाग हो जाते हैं, इन्हें दूर करने के लिए मेहंदी और साबुन बराबर मात्रा में मिलाकर उसका मरहम बनाएं और काले दागों पर नियमित लगाएं, दाग कुछ ही दिनों में दूर हो जाएंगे।  



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"रेशेदार भोजन" है स्वस्थ रहने के लिए अति आवश्यकता


"रेशेदार भोजन" है स्वस्थ रहने के लिए अति आवश्यकता 

हमें स्वस्थ रहने के लिए रेशेदार भोजन की आवश्यकता है। मांस, मैदा व रस में रेशा नहीं होता। हमें रिफाइन्ड फ़ूड की जगह रफ़ फ़ूड की जरूरत है। मोगर के स्थान पर छिलके वाली दाल, मैदे की जगह मोटा आटा, तले - भूने भोजन के स्थान पर अंकुरित एवं उबले हुए खाद्य पदार्थो का उपयोग, स्वस्थ रहने के लिए साबुत खाना श्रेयस्कर है। गाजर, सेव, नारंगी आदि को खाने से रेशायुक्त रस पेट में आता है। 
रेशे की कमी से बड़ी आँतों में कैंसर, कब्ज, बवासीर तथा फिशर होने की सम्भावना बढ़ जाती हैं। शाकाहारियों में मांसाहारियों की अपेक्षा आँतों के रोग कम होते हैं। मांसाहारियों में आँतों के रोगी अधिक पाये जाते हैं। 
फल सब्जियों का रस पीने से रेशा निकल जाता है। रस पीने से शरीर में कैलोरी की मात्रा बढ़ जाती है। इससे मोटापा बढ़ता है। रस के स्थान पर फल, सब्जी चबा - चबा कर खाना अधिक लाभदायक है। रेशायुक्त भोजन करने से बहुत - सी बीमारियों से बचाव हो जाता है। 
स्वस्थ रहना चाहते हैं तो भोजन नियमित, संतुलित एवं स्वास्थ्यवर्धक हो तथा रेशेदार भोजन को प्राथमिकता दीजिये।



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"नारियल तेल" है बालों के लिए सर्वोत्तम

"नारियल तेल" है बालों के लिए सर्वोत्तम 

बालों की सेहत की बात जब भी आती है, आपने अपनी दादी या नानी को नारियल तेल लगाने को कहते सुना होगा। जब बाल ज्यादा गिरने लगे तो मां कहती हैं तेल नहीं लगाते हो ये उसी का परिणाम है। हमारे बड़े लोगों ने नारियल तेल को बालों के लिए ऐसे ही लाभदायक नहीं कहा है इसके पीछे कई कारण हैं।


एक तो नारियल का तेल बाजार में आसानी से उपलब्ध हो जाता है। दूसरा यह बालों के लिए बहुत ही गुणकारी माना जाता है। नारियल का तेल एक ऐसा तेल है जो बालों की हर समस्या का समाधान कर सकता है। यदि आप जानना चाहते हैं कि नारियल तेल आपके बालों के लिए क्यों सबसे अच्छा है तो चलिए आज जानते हैं इसे लगाने से होने वाले फायदों के बारे में... 


1. यदि आपके बाल ज्यादा घंने और बार-बार उलझते हैं व उलझने के कारण टूटते हैं तो नारियल तेल लगाएं। बाल नहीं उलझेंगे।


2. नारियल का तेल बालों की जड़ को मजबूती देता है, जिससे बाल टूटना कम हो जाते हैं।

3. रूसी की समस्या आजकल बहुत आम हो गई है। इससे छुटकारा पाने के लिए बालों में हर हफ्ते नारियल तेल लगाया जाना चाहिए। यदि आप नियमित तौर पर इसे लगाएंगे तो आप हफ्ते भर में इसका चमत्कार देख पाएंगे।


4. नारियल का तेल बालों में लगाने से उनकी चमक अपने आप ही बढ़ जाती है और उनमें कुदरती शाइन आती है।


5. सिर में खुजली की समस्या हो तो नारियल तेल में कपूर मिलाकर लगाएं। यह समस्या खत्म हो जाएगी।



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"चावल" भी सेहत के लिए उपयोगी, लेकिन इसके बारे में कई भ्रांतियां


"चावल" भी सेहत के लिए उपयोगी, लेकिन इसके बारे में कई भ्रांतियां 

चावल को लेकर कई प्रकार की भ्रामक धारणाएं हैं जिनके बारे में जानना जरूरी है क्योंकि दुनियाभर में बड़ी संख्या में लोगों का मुख्य भोजन चावल है। सबसे दीर्घायु वाले देश जापान में भी लोग मुख्य रूप से चावल खाते हैं।
भ्रम: इसमें सिर्फ कार्बोहाइड्रेट है।
तथ्य : चावल में कार्बोहाइड्रेट के साथ जिंक की मात्रा भी होती है जो शरीर को फिट रखती है।
भ्रम: चावल खाने से वजन बढ़ता है।
तथ्य : सही मात्रा में खाया जाए तो यह कई रोगों से लडऩे में मददगार भी होता है। चावल में मौजूद स्टार्च में खनिज-लवण और विटामिन होते हैं इसलिए इन्हें पकाने से पहले बार-बार नहीं धोना चाहिए।
कई तरह से उपयोगी - चावल व मूंग की दाल की खिचड़ी खाने से दिमागी विकास होता है। कार्बोहाइड्रेट के कारण इसे ऊर्जा का अच्छा स्रोत माना जाता है। चावल में दूध व शक्कर मिलाकर खाने से पेट साफ हो जाता है। माइग्रेन होने पर रात को सोने से पहले चावल को शहद के साथ खाएं।    '


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हर्बल टी पीयें और रहें स्वस्थ और तरोताज़ा

हर्बल टी पीयें और रहें स्वस्थ और तरोताज़ा 

आप घरेलू जड़ी-बूटियों से बनी हर्बल टी आसानी से घर पर बना सकते हैं। इनके गुणों से कई रोगों में लाभ और आराम मिलता है।
अपच में जिंजर टी पिएं
मोशन न बनने की वजह से पेट में अपच, एसिडिटी, जी मिचलाना और उल्टी की तकलीफ हो तो जिंजर यानी अदरक वाली चाय पी सकते हैं। इसके लिए अदरक के एक टुकड़े को करीब 10 मिनट पानी में उबालें, फिर गैस से उतारकर इसमें नींबू का रस और शहद मिलाकर पिएं। इससे सर्दी-जुकाम में भी लाभ होगा।
इलायची-सौंफ की चाय
पेटदर्द और अपच की परेशानी में यह फायदेमंद है। एक चौथाई छोटा चम्मच इलायची पाउडर, आधा छोटा चम्मच सौंफ और एक टुकड़े अदरक को एक कप पानी में 10 मिनट के लिए उबालें। जरूरत के हिसाब से इसमें दालचीनी का छोटा टुकड़ा भी मिला सकते हैं।
तुलसी-चाय से लाभ
एक कप पानी में अदरक का छोटा टुकड़ा, 10 तुलसी के पत्ते, एक लौंग, तीन काली मिर्च और दालचीनी का टुकड़ा डालकर उबाल लें। जरूरत के अनुसार इसमें थोड़ा शहद भी मिलाया जा सकता है। सर्दी-जुकाम की तकलीफ के अलावा सिरदर्द, सीने में दर्द और पेट में भारीपन जैसी समस्याओं में यह चाय काफी असरदार होती है।
नोट : हर्बल टी में चायपत्ती की जरूरत नहीं होती है। गर्मी के इस मौसम में दूध, चायपत्ती और चीनी से बनी चाय का अधिक प्रयोग न करें वर्ना डिहाइड्रेशन (शरीर में पानी की कमी) की समस्या हो सकती है।



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"जामुन" मिटाये छाले और दूर करें दांतों के रोग

"जामुन" मिटाये छाले और दूर करें दांतों के रोग 

पेचिश : पेचिश में जामुन पर नमक लगाकर खाएं। 

छाले : छाले होने पर जामुन खाने से लाभ होता है।

कांख (आर्म पिट) : आर्म पिट में फुंसियां, दुर्गन्ध हो तो जामुन के पत्तों पर पानी डालकर पीस कर सुबह, शाम लेप करें। 

दांतों के रोग : यदि आपके दांतों में दर्द है, रक्त निकलता है, दांत हिलते हैं, मसूड़ें फूलते हैं तो आप 50 ग्राम जामुन के नए मुलायम, कच्चे पत्ते दो गिलास पानी में उबाल कर नित्य दो बार कुल्ला करें। 

दस्त : कैसे भी तेज दस्त हों, जामुन के पेड़ की 4 पत्तियां पीस लें, फिर  उसमें जरा - सा सेंधा नमक मिलाकर उसकी दो गोली बना लें। एक गोली सुबह, एक गोली शाम खाने से दस्त बंद हो जाते हैं। जामुन की दो पत्ती पर जरा - सा नमक डालकर चबाएं। रस चूस जाएँ और गूदा थूक दें। इस प्रकार सुबह शाम दो बार लें। दस्त बंद हो जाएंगे।



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गर्मी से बचाये यह पहाड़ी रसीला फल " काफल "

गर्मी से बचाये यह पहाड़ी रसीला फल " काफल "

यूं तो गर्मियों के मौसम को हमने चिलचिलाती धूप, पसीने, उमस के लिए जाना है, लेकिन ईश्वर ने हमें इनसे बचने के लिए आम, बेल, तरबूज एवं खरबूज जैसे विभिन्न फल भी दिए हैं। ठीक इसी प्रकार हिमालयी क्षेत्र में भी "काफल" नाम से जाना जाने वाला एक फल अनायास ही अपनी ओर हमारा ध्यान खींचता है। काफल के पेड़ काफी बड़े होते हैं,ये पेड़ ठण्डी छायादार जगहों में होते हैं। हिमाचल से लेकर गढ़वाल, कुमाऊं व नेपाल में इसके वृक्ष बहुतायत में पाए जाते हैं।
इसका छोटा गुठली युक्त बेरी जैसा फल गुच्छों में आता है, जब यह कच्चा रहता है तो हरा दिखता है और पकने पर इसमें थोड़ी लालिमा आ जाती है। इसका खट्टा-मीठा स्वाद बहुत मनभावन और उदर-विकारों में बहुत लाभकारी होता है। पर्वतीय क्षेत्रों में मजबूत अर्थतंत्र दे सकने की क्षमता रखने वाला "काफल" नाम से जाना जाता है, यह पेड़ अनेक प्राकृतिक औषधीय गुणों से भरपूर है।


दातून बनाने से लेकर, अन्य चिकित्सकीय कार्यों में इसकी छाल का उपयोग सदियों से होता रहा है। इसके अतिरिक्त इसके तेल व चूर्ण को भी अनेक औषधियों के रूप में उपयोग किया जाता रहा है। आयुर्वेद में इसके अनेक चिकित्सकीय उपयोग बनाए गए हैं। बहुधा यह पेड़ अपने प्राकृतिक ढंग से ही उगता आया है। माना जाता है कि चिड़ियों व अन्य पशु-पक्षियों के आवागमन व बीजों के संचरण से ही इसके पौधे तैयार होते हैं और सुरक्षित होने पर एक बड़े वृक्ष का रूप लेते हैं। आयुर्वेद में इसे "कायफल" के नाम से जाना जाता है।

इसकी छाल में मायरीसीटीन, माय्रीसीट्रिन एवं ग्लायकोसाईड पाया जाता है। मेघालय में इसे "सोह-फी " के नाम से जाना जाता है और आदिवासी लोग पारंपरिक चिकित्सा में इसका प्रयोग वर्षों से करते आ रहे हैं। विभिन्न शोध इसके फलों में एंटी-आॅक्सीडेंट गुणों के होने की पुष्टि करते हैं, जिनसे शरीर में आक्सीडेटिव तनाव कम होता और दिल सहित कैंसर एवं स्ट्रोक के होने की संभावना कम हो जाती है। इसके फलों में पाए जाने वाले फायटोकेमिकल पोलीफेनोल सूजन कम करने सहित जीवाणु एवं विषाणुरोधी प्रभाव के लिए जाने जाते हैं। 


"काफल" को भूख की अचूक दवा माना जाता है। मधुमेह के रोगियों के लिए भी इसका सेवन काफी लाभदायक है।