Friday, May 22, 2015

"पानी" से भी होते हैं कई इलाज़


"पानी" से भी होते हैं कई इलाज़ 

निरोग : पानी को थोड़ी - थोड़ी मात्रा में बार - बार पीना  स्वास्थ्य  के लिए हितकर माना गया है। प्यास के समय इच्छा के विपरीत बेहद ठूंस -ठूंस कर जल पीना हानिकारक होता है। भोजन, भजन एवं गमन से पूर्व तीन घूंट पानी अवश्य पीयें। तीन घूंट पानी, तन - मन करे निर्मल। सुबह नींद से उठते ही प्रभु स्मरण कर तीन घूंट पानी और रात को सोने से पूर्व तीन घूंट पानी पीना , स्वास्थयवर्धक व जरा -व्याधि विनाशक होता है।

सिर दर्द : यदि सर्दी - जुकाम की वजह से सिर दर्द है, तो गुनगुने पानी में पैर डाल कर लगभग आधा घंटे तक बैठ जाएँ। इससे सिर दर्द ठीक हो जायेगा तथा जुकाम में भी आराम मिलेगा।

 मोच, चोट : जब चोट लग जाती हैं , फिसल कर गिर जाते हैं तो चोट लगे स्थान पर सूजन आ जाती है दर्द बहुत होता है। चोट लग जाने से वाहिनियां क्षतिग्रस्त होने से सूजन आ जाती है। चोट लगने पर सूजन आने के बाद गर्म सेक नहीं करना चाहिए। बर्फ या ठन्डे पानी से चोट लगे स्थान को सेकना चाहिए। इससे सूजन कम होती है। चोट ग्रस्त अंग की रक्तनालियों के फटने से नील पड़ जाती है , काला नीला रक्त पैदा हो जाता है , ठंडा सेक करने से नील पड़ने वाली अवस्था उत्पन्न नहीं होती।

मलेरिया में तेज़ बुखार होने पर कुछ समय के अंतर से बार - बार ठन्डे पानी की पट्टी ललाट पर रखने से आराम मिलता है , तापमान गिरता है।

थकावट : गर्म पानी में थोड़ा सा नमक व नींबू निचोड़ कर पैर डुबोये रखें। फिर अँगुलियों पर तेल की मालिश करें, मरोड़ें। इससे थकान शीघ्र दूर होती है।

नेत्र की निरोगता : भोजन करने के बाद हाथों को पानी से धोकर गीले हाथों की दोनों हथेली आपस में रगड़ कर नेत्रों पर लगाएं। इस प्रकार नित्य करते रहने से नेत्रों में कभी भी कोई रोग नहीं होता और यदि कोई रोग है तो दूर हो जाता है।


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