Friday, May 29, 2015

"सोयाबीन" करे डायबिटीज़ और शरीर की अम्लता दूर

"सोयाबीन" करे डायबिटीज़ और शरीर की अम्लता दूर 

सोयाबीन : मनुष्य के शरीर को पोषण पहुँचाने के लिए, उसको निरोग रखने के लिए, उसको पुष्ट एवं कांतिवान बनाने के लिए तथा उसमें जीवनी शक्ति और रोग प्रतिरोधक क्षमता को कायम रखने के लिए जिन - जिन तत्वों की आवश्यकता होती है वे सब सोयाबीन में प्रचुर मात्रा में पाया जाते हैं। इसमें धातु और लवण 4 - 5 % पाये जाते हैं।  सोयाबीन दूध के समान है। सोयाबीन का प्रयोग कच्चा कदापि नहीं किया जाना चाहिए। इसमें एक हानिकारक तत्व भी पाया जाता है जो साधारण ताप देने मात्र से ही नष्ट हो जाता है। 
सोयाबिन में प्रोटीन 40 %, कार्बोहाइड्रेट 24.6 %, नमक 48 %, तेल 20 %, विटामिन ए, बी और डी तथा कैल्शियम, सोडियम, मैंगनीज़, फास्फोरस और क्षार, लवण और यौगिक काफी मात्रा में पाये जाते हैं। 

मानसिक रोग : सोयाबीन में फास्फोरस काफी मात्रा में पाया जाता है इस प्रकार वह मस्तिष्क तथा ज्ञान तंतुओं की बीमारी, जैसे - मिरगी, हिस्टीरिया, स्मरण शक्ति की कमजोरी, सूखा रोग और फुष्पुसा सम्बन्धी बिमारियों में उत्तम पथ्य का काम करता है।  यह तपेदिक और ज्ञान तंतुओं की बीमारी में बहुत लाभ पहुंचाता है। 
   
प्रोटीन : जितने अन्न एवं शाक होते हैं उनमें सोयाबीन की प्रोटीन शरीर के पोषण और हजम होने की दृष्टि से उत्तम होती है। इसमें करीब - करीब सब ख़ास - ख़ास एमिनो एसिड्स होते हैं, विशेषकर के ग्लाइसिन ट्रिप्टोफेट और लाइसिन काफी मात्रा में पाया जाते हैं। मांस की प्रोटीन में न्यूकिलियो प्रोटीन होता है, जिससे यूरिया एसिड बनता है और जो शरीर के सब जोड़ों में जमा होकर गठिया की बीमारी पैदा करता है। मांस की जगह सोयाबीन खाने से प्रोटीन तो मिलती है मगर एसिड पैदा नहीं होता और मनुष्य गठिया और गुर्दे की बीमारियों से सुरक्षित रहता है। 
अम्लता : सोयाबीन की एक विशेषता यह है कि यह शरीर की अम्लता को कम करती है और क्षार की मात्रा को बढ़ाती है। इसलिए शरीर में अम्लता बढ़ने से जिन - जिन रोगों की उत्पत्ति होती है उनसे यह शरीर की रक्षा करती है तथा वर्तमान में पेट की जलन, तेज़ाब ज्यादा बनने की बीमारी के खाद्य के रूप में इलाज़ के काम आती है जो तत्काल फायदा करती है। 
मधुमेह : सोयाबीन मोटे भारी भरकम शरीर वालों के तथा मधुमेह ( डायबिटीज़ ) वाले लोगों के लिए उत्तम पथ्य है। सोयाबीन में स्टार्च और कार्बोहाइड्रेट इतने कम मात्रा में होते हैं कि मधुमेह रोगियों को पथ्य के रूप में दिया जा सकता है। यही दो चीजें मुख्य रूप से मधुमेह के रोगियों को हानि पहुंचाती है। 
सोयाबीन का तेल कोलेस्ट्रोल रहित है। यह ह्रदय - रोगियों  व मंदाग्नि के रोगियों के लिए लाभदायक होता है।



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