Saturday, May 2, 2015

गर्मियों में राहत दे 'बेल का फल'

गर्मियों में राहत दे 'बेल का फल' 

गर्मियों ने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया है, इसलिए अपने पेट और दिमाग को शांत रखना जरूरी है। बील या बेल एक ऐसा ही फल हो, जो अपने विशेष गुणों के कारण गर्मियों में अधिक उपयोग किया जाता है। आयुर्वेद में भी बेल के फल और पत्र दोनों को समान रूप से उपयोगी माना गया है। फल की मज्जा में क्यूसिलेज पेक्टिन तथा टेनिन आदि रसायन पाए जाते हैं। फल का गूदा, बेल-पत्र, मूल एवं छाल का चूर्ण तथा पेड़ के अन्य सभी अंग एवं अवयव उपयोग में लिए जाते हैं। बेल का चूर्ण बनाने के लिए कच्चा, मुरब्बे के लिए अधपका और ताजे शर्बत के लिये पके हुए फल का उपयोग होता है।

अस्थमा
बेल-पत्रों से बना क्वाथ (काढ़ा) सर्दी-जुकाम के कहर को कम करता है। यह सर्दी से होने वाली श्लेष्मा (कफ) को कम करता है और अस्थमा के प्रसार को धीमा करता है।
आंखों का संक्रमण
बेल-पत्रों को आंखों में होने वाले विभिन्न संक्रमण तथा सूजन के निदान में व्यवहार किया जाता है। खासतौर से नेत्र-शोध(Psoralen)  यह बहुत प्रभावी होता है।

बुखार
बेल-मूल तथा पेड़ का छाल से बने क्वाथ से विभिन्न तरह के ज्वरों का इलाज किया जाता है। आयुर्वेदिक चिकित्सा में बेल-मूलों से वात-कफ-पित्त से होने वाले दोषों तथा ज्वरों को ठीक किया जाता है।

कब्ज
उदर विकारों में बेल का फल अचूक दवा के रूप में  उपयोग किया जाता है। फल के नियमित सेवन से कब्ज जड़ से समाप्त हो जाता है। बेल फल उदर की स्वच्छता के अलावा आंतों को साफ कर उन्हें ताकत भी देता है।

डायरिया
गर्मियों में प्राय: अतिसार/ डायरिया की वजह से पतले दस्त होने लगते हैं, ऐसी स्थिति में कच्चे बेल को आग में भून कर उसका गूदा, रोगी को खिलाने से फौरन लाभ मिलता है। बेल का मुरब्बा खाने से पित्त व अतिसार में लाभ होता है। पेट के सभी रोगों में बेल का मुरब्बा खाना लाभप्रद है।

गर्मियों में जरा-सी असावधानी से लू लगने का खतरा बना रहता है, इसलिए गर्मियों में बेल का सेवन जरूर करें। अगर लू लग जाए, तो निवारण करने के लिए बेल के ताजे पत्तों को पीसकर मेहंदी की तरह पैर के तलुओं में ठीक से मलें। इसके अलावा सिर, हाथ, छाती पर भी इसकी मालिश करने से राहत मिलती है।  बेल के शर्बत में मिश्री मिलाकर पीने से भी तुरंत राहत मिलती है।

अल्सर
बेल फल  तथा बेल पत्रों के रस से बनी दवाओं का प्रयोग पेप्टिक अल्सर को ठीक करने के लिए किया जाता है। फल के गूदे से गैस्ट्रिक म्यूकोसा पर म्यूसिलेजिनस लेयर बन जाती है, जिससे अम्लता म्यूकोसल स्तर के साथ प्रतिक्रिया नहीं कर पाती है और अल्सर बढऩे से रूक जाता है। 

बेल की जड़ों में एस्ट्रिंजेंट ए्क्टिविटी पाई जाती है और इसी वजह से यह घरेलू उपायों में कान की समस्या को दूर करने के लिए उपयोग किया जाता है। बेल की जड़ों को नीम के पत्तों के साथ मिलाकर बनी दवाएं कान के संक्रमण, असाध्य सूजन तथा पस को निकलाने में मदद करती है।

कैंसर
अध्ययनों ने बताया है कि बेल फल के सत्त में एंटी-प्रोलिफरेटिव एक्टिविटी होती है। जो मानवों में ट्यूमर सेल्स के फैलाव को रोकने में मदद करती है। गूदे से बने शर्बत में जल में घुलनसील एंटी-ऑक्सीडेंट्स, फेनोलिक तत्व तथा एंटी-म्यूटाजेन्स पाए जाते हैं, जो कैंसर-रोधी होते हैं तथा ये शरीर की सेल्स को फ्री-रेडिएशन से होने वाली क्षति से बचाते हैं।  

ल्यूकोडर्म
बेल फल के स्वादिष्ट तथा सुंगधित गूदे में सोरेलेन (क्कह्यशह्म्ड्डद्यद्गठ्ठ) नामक घटक पाया जाता है, जो सामान्य त्वचा की कड़ी धूप को सहने की शक्ति या टोलेरेंस पॉवर बढ़ाता है। इससे त्वचा का सामान्य रंग नहीं बदलता। त्वचा के सामान्य रंग से श्वेत होने की स्थिति को ल्यूकोडर्म कहते हैं और बेल फल का सेवन इस त्वचा विकार का अचूक उपाय माना जाता है।

मधुमेह
मधुमेह रोगियों के लिए बेल फल बहुत लाभदायक है। इसकी पत्तियों को पीसकर उसके रस का दिन में दो बार सेवन करने से मधुमेह रोगियों की रिस्क कम होती है।  पत्तों के सत्त से ब्लड यूरिया तथा कोलेस्ट्रोल को सार्थक तरीके से कम करता है। बेल प्राकृतिक तौर पर एक क्षारीय फल है, जो शरीर से जहरीले पदार्थ निकालता है, अम्लीयता कम करता है।

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