Saturday, May 9, 2015

सेहत के लिए गुणकारी है 'हरड़'

सेहत के लिए गुणकारी है 'हरड़' 

हरड़ में इतने गुण पाए जाते हैं कि ये हमें कई रोगों से छुटकारा दिलवाती है। हरड़ भी दो प्रकार की होती हैं- बड़ी हरड़ और छोटी हरड़। हरड़ को हरीतकी नाम से भी जाना जाता है। हरड़ काले व पीले रंग में पाई जाती है। खाने में इसका स्वाद खट्टा,मीठा होता है। इसमें कई प्रकार के पदार्थ पाए जाते है। ग्लाइकोसाइड्स जैसा पदार्थ हमारे शरीर को कब्ज से छुटकारा दिलवाने में मदद करता है। वर्षा ऋतु में हरड़ का सेवन सेधा नमक के साथ करना चाहिए। हरड़ से बना चूर्ण और गोलियां बाजार से आसानी से उपलब्ध हो जाती है। हरड़ खाने के कुछ लाभ इस प्रकार है …… 
तनाव, अनिद्रा, व्यायाम न करना, दवाओं के अधिक सेवन, फाइबर वाला भोजन न करनेे, मधुमेह या फिर बढ़ती उम्र से कब्ज हो सकती है। ऐसे में इन उपायों का प्रयोग किया जा सकता है।
2-3 छोटी हरड़ को चबाने से कब्ज में आराम मिलता है। बिना छिलके वाली उड़द की दाल कब्ज करती है इसलिए इन्हें दिन के समय खाएं या इनके स्थान पर छिलके वाली दालों का प्रयोग कर सकते हैं। अंजीर, पपीता और मुनक्का कब्ज में उपयोगी होता है लेकिन डायबिटीज वाले इन्हें न खाएं।
हरड़ से बनी गोलियों का सेवन करने से  भूख बढ़ती है। उल्टी होने पर हरड़ और शहद का सेवन करने से उल्टी आना बंद हो जाता है। हरड़ को पीसकर आंखों के आसपास लगाने से आंखों के रोगों से छुटकारा मिलता है। भोजन के बाद अगर पेट में भारीपन महसूस हो तो हरड़ का सेवन करने से राहत मिलती है। हरड़ का सेवन लगातार करने से शरीर में थकावट महसूस नहीं  होती और स्फूर्ति बनी रहती है। हरड़ का सेवन गर्भवती स्त्रियों को नहीं करना चाहिए। हरड़ पेट के सभी रोगों से राहत दिलवाने में मददगार साबित हुई है। खुजली जैसे रोग से भी छुटकारा पाया जा सकता है। अगर शरीर में घाव हो जांए हरड़ से उस घाव को भर देना चाहिए।
बड़ी हरड़ के छिलके, अजवाइन एवं सफेद जीरा बराबर बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बनाकर रख लें। इस चूर्ण को प्रतिदिन सुबह—शाम दही में मिलाकर लेते रहने से सूखी आंव तथा मरोड़ में लाभ पहुंचता है। काली हरड़ को महीन पीसकर मुंह तथा जीभ के छालों पर लगाते रहने से छालों से मुक्ति मिलती है। प्रतिदिन दो—चार बार लगाते रहने से हरेक प्रकार के छालों से मुक्ति मिलती है। पीली हरड़ के छिलके का चूर्ण तथा पुराना गुड़ बराबर मात्रा में लेकर गोली बनाकर रख लें। मटर के दानों के बराबर वाली इन गोलियों को दिन में दो बार सुबह—शाम पानी के साथ एक महीनें तक लेते रहने से यकृत लीवर एवं प्लीहा के रोग दूर हो जाते हैं। पुराने कब्ज के रोगी को नित्यप्रति भोजन के आधा घंटा बाद डेढ़—दो ग्राम की मात्रा में हरड़ का चूर्ण गुनगुने पानी के साथ लेते रहने से फायदा होता है।


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एक मध्यम आकार की पीली हरड़ के दो टुकड़े छिलके सहित कांच के गिलास में इस तरह भिगो दें कि वह भीगने पर पूरी तरह फूल जाये। चौदह घण्टे भीगने के बाद हरड़ की गुल्ली को निकालकर उसके अन्दर के बीजों को निकालकर गुल्ली को खूब चबा—चबाकर खायें तथा ऊपर से हरड़ वाला पानी पी लें। एक माह तक इस विधि का सेवन लगातार करते रहने से प्रोस्टेट ग्लैण्ड्ज की सूजन ठीक हो जाती है।
जिन नवजात शिशुओं के भौहें नहीं हों, हरड़ को लोहे पर घिसकर, सरसों तेल के साथ मिलाकर शिशु के भौंह वाले स्थान पर धीरे—धीरे मालिश करते रहने से भौंह उगने लगते हैं । अगर सप्ताह में एक बार बच्चे को हरड़ पीसकर खिलाया जाता रहे, तो उसे जीवन में कब्ज का सामना कभी नहीं करना पड़ता है। हरड़, सेंधा नमक तथा रसौंत को पानी में पीसकर आंख के ऊपरी भाग के चारों तरफ लेप करने से आंख आना, आंखों की सूजन, व दर्द नष्ट हो जाते हैं।
नित्यप्रति प्रातकाल शीतल जल के साथ तीन ग्राम की मात्रा में छोटी हरड़ का चूर्ण सेवन करते रहने से सफेद दाग मिटाने शुरू हो जाते हैं। शरीर के जिन अंगों पर दाद हो, वहां बड़ी हरड़ को सिरके के साथ घिसकर लगाने से लाभ होता है।

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