Saturday, May 2, 2015

कैंसर को मात दे "सीताफल"

कैंसर को मात दे "सीताफल" 

सीताफल या शरीफा एक उष्णकटिबंधीय फल है, जो विश्व के अधिकतर देशों में पाया जाता है। पके हुए सीताफल ही स्वास्थ्य की दृष्टि से केवल उपयोगी  नहीं होते हैं, बल्कि इसके बीज भी गुणों से भरपूर होते हैं। हालांकि इन बीजों का प्रत्यक्ष सेवन नहीं करना चाहिए, लेकिन इनसे बनी दवाएं कैंसर को रोक सकती हैं। 

बिलासपुर विश्वविद्यालय में छत्तीसगढ़ सहित आंध्र प्रदेश, ओडिशा, महाराष्ट्र के कुछ क्षेत्रों में चल रहे शोध के दौरान ही इसके बीज के चमत्कारिक गुणों का पता चला है।

गुणों की भरमार
सीताफल के बीज में प्राकृतिक एंटी ऑक्सीडेंट्स, विटामिन-सी बहुत अधिक मात्रा में होता है। यह फल ऊर्जा का अच्छा स्रोत है, इसमें विटामिन-बी भी होता है। फल का नियमित सेवन एनीमिया से बचाता है, बीज में मौजूद मैग्नीशियम   शरीर में पानी संतुलित करता है। यह  ब्लड प्रेशर में अचानक होने वाले बदलाव तथा शुगर की मात्रा को भी नियंत्रित करता है। 

फल में समाए कई गुण
पाचन बेहतर बनाए
सीताफल में कॉपर और डाइटरी फाइबर  की अधिकता से पाचन प्रणाली बेहतर रहती है। इसके गूदे में उपस्थित मैग्नीशियम अपच की दिक्कतों से निजाद दिलाकर कब्ज की शिकायत दूर करता है।

जोड़ों के दर्द को दे आराम
सीताफल में मैग्नीशियम की प्रचुरता होती है, जो शरीर में सामान्य तरल प्रणाली तथा इलेक्ट्रोलाइट संतुलन में मदद करता है। इससे जोड़ों में बढ़ रहे अम्लीय तरल को निकलने तथा सूजन कम होने में मदद मिलती है।

जुएं को मार भगाए
सीताफल के बीजों से सिर में होने वाले जुओं और लीक से निजाद मिलती है। बीजों से बने ताजे चूर्ण को पानी में मिलाकर पेस्ट बनाया जाता है और इसे बालों की जड़ों में लगाकर 20 मिनट बाद सिर धो लेने से जुएं मर जाते हैं।

दिल रखे मजबूत
फल में उपस्थित मैग्नीशियम तथा पोटेशियम, नियासिन, विटामिन बी6 कार्डियोवैस्क्यूलर हेल्थ को जोखिमों से बचाते हैं। ये घटक रक्तचाप के स्तर को व्यवस्थित करते हैं और मांसपेशियों को आराम भी देते हैं।

अवसाद से लडऩे की शक्ति दे
शरीफा त्वरित ऊर्जा देने वाले फलों में से एक है। 100 ग्राम खाने योग्य गूदे में (बीज विहीन) 104 कैलोरीज होती है। यह अधिक परिश्रम से होने वाले तथा कमजोरी को तुरंत कम करता है। यह रक्त संचार बेहतर करता है।

शोध ने जगाई उम्मीद
सीताफल के बीज, रोगों से लडऩे की क्षमता बढ़ाते हंै। इसके सेवन से कैंसर और डाइबिटीज को नियंत्रित किया जा सकता है। इसके बीज पर किए गए नए शोध को विदेशों में भी सराहा गया है। शोध के आधार पर दवा तैयार करने पर भी जोर दिया गया है। छत्तीसगढ़ के पेंड्रा, अंबिकापुर, कांकेर और रायपुर के कुछ सीताफलों के बगीचों से लाए गए बीजों पर शोध किया गया। सबसे पहले शोध का परिणाम आंध्र प्रदेश के गीतम विश्वविद्यालय को भेजा गया। 

आंखों को बेहतर रखे
अगर आपको अपनी आंखों को स्वस्थ तथा ओप्टिक नर्व को हेल्दी रखना है, तो कस्टर्ड एप्पल का नियमित सेवन करेंं। शरीफा में विटामिन सी तथा विटामिन ए की प्रचुरता होती है, जो आंखों की रोशनी को गिरने नहीं देते हैं। फल में विटामिन बी2 तथा राइबोफ्लेविन की उपस्थिति से आंखों को होने वाली दिक्कतों से राहत मिलती है। ये दोनों तत्व फ्री रेडिकल्स से होने वाली क्षति को दूर करने में मदद करते हैं और नजर संबंधी दिक्कतों को बढऩे नहीं देते हैं।

गर्भवती के लिए लाभप्रद
प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए शरीफा को वंडर फ्रूट माना जाता है, क्योंकि यह उनमें होने वाली मूड स्विंग्स, मॉर्निंग सिकनेस व सुन्नता को दूर करता है। यह भ्रूण के ब्रेन, नर्वस सिस्टम तथा प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत करता है। 

नियमित सीताफल खाने से कैल्शियम मिलता है और गर्भपात होने का जोखिम कम हो जाता है। यह लेबर पेन भी घटाता है। दुग्धपान कराने वाली मां के लिए सीताफल बहुत लाभदायक है, यह ब्रेस्ट मिल्क प्रोडक्शन बढ़ाता है।

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