Friday, May 29, 2015

"सोयाबीन" करे डायबिटीज़ और शरीर की अम्लता दूर

"सोयाबीन" करे डायबिटीज़ और शरीर की अम्लता दूर 

सोयाबीन : मनुष्य के शरीर को पोषण पहुँचाने के लिए, उसको निरोग रखने के लिए, उसको पुष्ट एवं कांतिवान बनाने के लिए तथा उसमें जीवनी शक्ति और रोग प्रतिरोधक क्षमता को कायम रखने के लिए जिन - जिन तत्वों की आवश्यकता होती है वे सब सोयाबीन में प्रचुर मात्रा में पाया जाते हैं। इसमें धातु और लवण 4 - 5 % पाये जाते हैं।  सोयाबीन दूध के समान है। सोयाबीन का प्रयोग कच्चा कदापि नहीं किया जाना चाहिए। इसमें एक हानिकारक तत्व भी पाया जाता है जो साधारण ताप देने मात्र से ही नष्ट हो जाता है। 
सोयाबिन में प्रोटीन 40 %, कार्बोहाइड्रेट 24.6 %, नमक 48 %, तेल 20 %, विटामिन ए, बी और डी तथा कैल्शियम, सोडियम, मैंगनीज़, फास्फोरस और क्षार, लवण और यौगिक काफी मात्रा में पाये जाते हैं। 

मानसिक रोग : सोयाबीन में फास्फोरस काफी मात्रा में पाया जाता है इस प्रकार वह मस्तिष्क तथा ज्ञान तंतुओं की बीमारी, जैसे - मिरगी, हिस्टीरिया, स्मरण शक्ति की कमजोरी, सूखा रोग और फुष्पुसा सम्बन्धी बिमारियों में उत्तम पथ्य का काम करता है।  यह तपेदिक और ज्ञान तंतुओं की बीमारी में बहुत लाभ पहुंचाता है। 
   
प्रोटीन : जितने अन्न एवं शाक होते हैं उनमें सोयाबीन की प्रोटीन शरीर के पोषण और हजम होने की दृष्टि से उत्तम होती है। इसमें करीब - करीब सब ख़ास - ख़ास एमिनो एसिड्स होते हैं, विशेषकर के ग्लाइसिन ट्रिप्टोफेट और लाइसिन काफी मात्रा में पाया जाते हैं। मांस की प्रोटीन में न्यूकिलियो प्रोटीन होता है, जिससे यूरिया एसिड बनता है और जो शरीर के सब जोड़ों में जमा होकर गठिया की बीमारी पैदा करता है। मांस की जगह सोयाबीन खाने से प्रोटीन तो मिलती है मगर एसिड पैदा नहीं होता और मनुष्य गठिया और गुर्दे की बीमारियों से सुरक्षित रहता है। 
अम्लता : सोयाबीन की एक विशेषता यह है कि यह शरीर की अम्लता को कम करती है और क्षार की मात्रा को बढ़ाती है। इसलिए शरीर में अम्लता बढ़ने से जिन - जिन रोगों की उत्पत्ति होती है उनसे यह शरीर की रक्षा करती है तथा वर्तमान में पेट की जलन, तेज़ाब ज्यादा बनने की बीमारी के खाद्य के रूप में इलाज़ के काम आती है जो तत्काल फायदा करती है। 
मधुमेह : सोयाबीन मोटे भारी भरकम शरीर वालों के तथा मधुमेह ( डायबिटीज़ ) वाले लोगों के लिए उत्तम पथ्य है। सोयाबीन में स्टार्च और कार्बोहाइड्रेट इतने कम मात्रा में होते हैं कि मधुमेह रोगियों को पथ्य के रूप में दिया जा सकता है। यही दो चीजें मुख्य रूप से मधुमेह के रोगियों को हानि पहुंचाती है। 
सोयाबीन का तेल कोलेस्ट्रोल रहित है। यह ह्रदय - रोगियों  व मंदाग्नि के रोगियों के लिए लाभदायक होता है।



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Thursday, May 28, 2015

"तुलसी" है बिमारियों को भगाने में उस्ताद

"तुलसी" है बिमारियों को भगाने में उस्ताद 

तुलसी दो प्रकार की होती है- प्रथम श्वेत तुलसी (राम तुलसी) तथा दूसरी काली तुलसी (श्याम तुलसी)। वैसे गुणों में की दृष्टि से श्वेत और काली तुलसी एक समान है। तुलसी के पौधों से वातावरण शुद्ध रहता है। तुलसी कीटाणु रूपी राक्षसों का संहार करने वाली है। तुलसी के पौधे लगाने और उसको सींचने से रोगों - संतापों का नाश हो जाता है। 

कैंसर : 40 पत्ते तुलसी के पीस कर एक कप छाछ में मिलकर सुबह,शाम दो बार नित्य पिलायें। दूध, दही अधिक सेवन करें। कैंसर दूर करने में यह लाभदायक है। 

बुखार, जुकाम, निमोनिया, इन्फ्लूएजा, मलेरिया आदि रोगों के होने पर तुलसी, अदरक, काली मिर्च, पतासे का काढ़ा पीना चाहिए तथा रोगी को तुलसी के 4 पत्ते व लौंग डालकर उबाल गया पानी बार - बार पिलावें। शीघ्र लाभ मिलता है। 

सूजन : तुलसी के पत्तों का लेप जहाँ सूजन हो वहां करने से सूजन में लाभ होता है। यदि दांत दर्द से जबड़े पर  सूजन हो तो वह भी ठीक हो जाती है। 

अपच : (1) एक मुट्ठी भर तुलसी के पत्ते, दस ग्राम सौंठ, बीस ग्राम गुड़ सब पीसकर गोलियां बना लें। एक - एक गोली नित्य तीन बार खाएं। (2) चौथाई चम्मच काला नमक और 50 तुलसी के पत्ते पीस कर खाएं और एक गिलास पानी पीयें। 

चेहरे पर काले दाग : तुलसी के पत्तों पर नींबू निचोड़कर बारीक पीसकर धब्बों नित्य लेप करें। 

ज्वर, खांसी : सौ तुलसी के पत्ते पीसकर दो चम्मच शहद में मिलाएं। इसमें एक चम्मच अदरक का रस मिलाएं। यह सुबह शाम दो बार पिलायें। ज्वर, खांसी में लाभ होता है।  



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खुशबु और सुंदरता ही नहीं सेहत भी बनाये "फूल"

खुशबु और सुंदरता ही नहीं सेहत भी बनाये "फूल" 

फूलों की खूशबू और उनकी सुंदरता तो हम सभी का मन मोह लेती है, लेकिन क्या आप जानते है कि हम फूलों को भी खा सकते हैं। खाने में फूलों का उपयोग भले ही हम सीधे न कर पाएं, लेकिन सही पर फूलों का इस्तेमाल हम कई चीजें में करते हैं, फिर चाहे वह खाना हो या सलाद। 

हजारो सालों से हम फूलों कि सुंदरता को देखते और महक का आनंद लेते आए हैं। उनके इन्हीं रंगों में उनकी बहुत सारी खूबियां छिपी हुई हैं। अभी तक अधिकांश लोग यही जानते थे कि फूलों का उपयोग सिर्फ इत्र बनाने में होता है,तो आइए जाने कुछ ऐसे ही फूलों को जो हमारे भोजन को स्वादिष्ट बनाते हैं।

1. गुड़हल के फूल- इन फूलों का इस्तेमाल सलाद को गार्निश करने के लिए होता है, इसके अलावा चाय में भी गुड़हल के फूलों का इस्तेमाल होता है। इनमें भरपूर मात्रा में एंटी-आक्सीडेंट पाए जाते हैं जो लो-ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करते हैं।
2. एप्पल और ऑरेंज के फूल- ये दोनों फूल सबसे ज्यादा खाए जाते हैं, इन्हें खाने से कई रोग दूर होते हैं। इसके बारे में कुछ ही लोग जानते हैँ, लेकिन इनका उपयोग कम मात्रा में करना चाहिए।

3.बबूने का फूल(कैमोमाइल) - यह फूल आपको शान्त रखने में मदद करता है, इसीलिए इसका इस्तेमाल चाय में किया जाते है। इसमें एंटीइनफ्लेमेटरी, एंटी-कार्सनोजेनिक और घाव भरने के गुण पाए जाते


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4. पैन्सी -  यह चमकीले रंग के बड़े फूल सिर्फ खूबसूरत नहीं होते, बल्कि इनके कई और फायदे भी हैं। यह फूल दिल, गुर्दा, ब्लड प्रेशर के लिए फायदेमंद होते हैं, और इनमें पोटैशियम और अन्य खनिज बहुत अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं।

5. गुलाब - गुलाब की लगभग सभी किस्में खाने योग्य होती हैं। इसकी पत्तियों का उपयोग सलाद, आइसक्रीम, मिठाई, गुलाब-जल, जैम-जेली, शर्बत और भोजन की गार्निशिंग करने में किया जाता है। यही नहीं दिल के रोग, कैंसर और डायबिटीज के खतरे को कम करने के लिए भी इनका इस्तेमाल होता है।

6. लैवेंडर फूल - इन खुशबूदार फूलों का इस्तेमाल आइस्क्रीम और दही में किया जाता है। इसका इस्तेमाल एंटीसेप्टिक और बालों की रूसी को रोकने में भी होता है।

7.गुलदाउदी - कैमोमाइल की तरह ही गुलदाउदी का चाय में इस्तेमाल होता है। गुलदाउदी में एंटी ऑक्सीडेंट और मिनरल्स के अलावा एंटी इन्फ्लेमेटरी, एंटी-कार्सनोजेनिक गुण भी पाए जाते हैं।

Wednesday, May 27, 2015

गर्मियों में खूब खाएं "खरबूजा"

गर्मियों में खूब खाएं "खरबूजा" 

गर्मी के तपते दिनों में यदि जूस, शेक या शर्बत, आदि पीने को मिल जाएं तो गर्मी से कुछ राहत मिल जाती है और शरीर में स्फूर्ती भी आ जाती हैं। गर्मी के दिनों में ऎसे कई फल आते हैं जिनका आप शर्बत या शेक बना सकते हैं। उन्हीं में से एक फल है खरबूजा। खरबूजे में 53 कैलोरी उर्जा होती है और यह विटामिन ए और सी से भरपूर होता है। इसमें 95 फीसदी पानी के साथ विटामिन और मिनरल्स भी पाए जाते हैं।


खरबूजे में मौजूद पानी से शरीर को ठंडक मिलती है। इसलिए गर्मियों में इसके सेवन को बहुत लाभदायक माना जाता है। इसके बीज में प्रोटीन और तेल काफी मात्रा में होता है। पुरानी खाज में खरबूजे का रस लाभदायक है। इससे कब्ज व एसिडिटी की समस्या भी दूर हो जाती है। चलिए, आज जानते हैं गर्मी में खरबूजा खाने से होने वाले ऐसे ही कुछ फायदों के बारे में...
1. त्वचा को बनाएं जवान
खरबूजे में भरपूर मात्रा में एंटी-ऑक्सीडेंट होते हैं। साथ ही, पर्याप्त मात्रा में विटामिन सी व विटामिन ए पाया जाता है। इसके नियमित सेवन से त्वचा जवां बनी रहती है।


2. कैंसर से बचाता है-
खरबूजे में ऑर्गेनिक पिगमेंट केरोटीनाइड पाया जाता है, जो कैंसर से बचाने के साथ ही किसी भी तरह के कैंसर की संभावना को भी कम कर देता है।

3.दिल को सुरक्षित रखता है-
खरबूजे में एडेनोसीन नामक एंटीकोएगुलेंट पाया जाता है, जो ब्लड सर्कुलेशन को ठीक करता है और खून का थक्का नहीं जमने देता है। इसके नियमित सेवन से दिल से संबंधित बीमारियां दूर रहती हैं।


4. पाचन की समस्याएं दूर करता है -

खरबूजा कब्ज की समस्या दूर करता है। यदि आप पाचन की समस्या से जूझ रहे हैं, तो खरबूजा खाइए। खरबूजे में मौजूद पानी की मात्रा भोजन के पाचन में सहायक होती है। इसमें पाए जाने वाले मिनरल्स पेट से जुड़ी समस्याओं को दूर कर पाचन प्रक्रिया दुरुस्त कर देते हैं।

5.चेहरा चमकने लगता है -
स्किन में कनेक्टिव टिशू पाए जाते हैं। खरबूजे में पाया जाने वाले कोलाजन प्रोटीन इन कनेक्टिव टिशू में कोशिका की संरचना को बनाए रखता है। कोलाजन से जख्म भी जल्दी ठीक होते हैं और त्वचा को मजबूती मिलती है। यदि आप लगातार खरबूजा खाएंगे तो चेहरा चमकने लगेगा।

6.किडनी को स्वस्थ बनाए रखता है -

खूरबूजे में डाइयुरेटिक (मूत्रवर्धक) क्षमता काफी अच्छी होती है। इस कारण इससे किडनी की बीमारियां ठीक होती हैं। यदि खरबूजे में नींबू मिलाकर इसका सेवन किया जाए तो इससे गठिया की बीमारी भी ठीक हो सकती है।

7.ऊर्जा को बढ़ाता है -
खरबूजे में विटामिन बी पाया जाता है। यह शरीर में ऊर्जा के निर्माण में सहायक होता है। शुगर और कार्बोहाइड्रेट को संशोधित करने के लिए यह ऊर्जा शरीर के लिए आवश्यक होती है।


8.वजन कम करने में होता है मददगार -

जो लोग वजन कम करना चाहते हैं, उन्हें गर्मी में रोज खरबूजे का सेवन करना चाहिए। इसमें काफी कम मात्रा में सोडियम पाया जाता है। साथ ही, यह फैट और कोलेस्ट्रॉल से भी मुक्त होता है। इसमें कम मात्रा में कैलोरी होती है। एक कप खरबूजे में सिर्फ 48 कैलोरी ऊर्जा होती है। इसलिए यह बढ़ते वजन को नियंत्रित करने में काफी मददगार होता है।

9.आंखों को स्वस्थ बनाता है -
खरबूजे में विटामिन ए बहुत अधिक मात्रा में पाया जाता है। साथ ही, इसमें बीटा-केरोटीन भी होता है। इसलिए इसके नियमित सेवन से आंखें स्वस्थ रहती हैं और आंखों से जुड़ा कोई रोग परेशान नहीं करता है।


10.तनाव से मुक्ति दिलाता है -

खरबूजे में काफी मात्रा में पोटैशियम मौजूद होता है। पोटैशियम दिल को सामान्य रूप से धड़कने में मदद करता है, जिससे मस्तिष्क में पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन पहुंचती है और तनाव से भी मुक्ति मिलती है।


11.डायबिटीज में भी है फायदेमंद -

डायबिटीज के रोगियों के लिए खरबूजा बहुत फायदेमंद होता है। माना जाता है कि जो डायबिटीज रोगी गर्मी में रोज एक गिलास खरबूजे का जूस लेते हैं, उनका कोलेस्ट्रॉल हमेशा कंट्रोल में रहता है।

Tuesday, May 26, 2015

"पान के पत्तों" में छिपा है जुकाम का इलाज़

"पान के पत्तों" में छिपा है जुकाम का इलाज़ 

हवन व पूजा-पाठ आदि में इस्तेमाल होने वाले पान के पत्तों में प्रोटीन, कार्बाेहाइड्रेट, टैनिन, कैल्शियम, फॉस्फोरस, आयोडीन व पोटेशियम जैसे मिनरल्स प्रचुर मात्रा में होते हैं।

सर्दी-जुकाम में इनका उपयोग आयुर्वेदिक इलाज के रूप में किया जा सकता है।

हल्दी का टुकड़ा सेंककर पान पत्ते में डालकर खाने से लाभ होगा।

रात में तेज खांसी चलती हो तो पान के पत्ते में अजवाइन व मुलैठी का टुकड़ा डालकर खा सकते हैं।
बच्चों को सर्दी-जुकाम हो तो एक पत्ते पर हल्का गर्म सरसों का तेल लगाकर बच्चों के सीने पर रखने से आराम मिलता है।

2-3 पत्तों के रस में शहद मिलाकर दिन में दो बार लेने से लाभ होगा। बच्चों को आधा चम्मच रस ही दें।

ये न करें उपयोग 
हालांकि चरक संहिता में बतौर माउथ फ्रेशनर इलायची, लौंग, जावित्री के साथ पान पत्ता खाना बताया गया है। लेकिन जिन्हें टीबी, पित्त संबंधी रोग, नकसीर, त्वचा व गले में रूखापन, आंखों से जुड़ी समस्या या बेहोशी जैसी बीमारियां हों तो वे पान के पत्तों का उपयोग न करें। 

काला है तो क्या..... रंगत निखारे "काला नमक"

काला है तो क्या..... रंगत निखारे "काला नमक" 

 काले नमक को आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में एक ठंडी तासीर का मसाला माना जाता है और इसका प्रयोग पाचन सहायक के रूप में किया जाता है। यह भी माना जाता है कि यह पेट की गैस (उदर वायु) और पेट की जलन में यह राहत प्रदान करता है। इसे कभी कभी उच्च रक्तचाप या कम नमक का आहार लेने वाले व्यक्ति भी प्रयोग करते हैं क्योंकि यह माना जाता है कि इसमें आम नमक की तुलना में कम सोडियम होता है। और तो और यह सुंदरता भी निखारता है। यह स्किन के  पोर्स खोल देता है और ब्‍लड सर्कुलेशन बढ़ाता है, जिससे त्‍वचा हमेशा हाइड्रेट बनी रहती है।
रूखी त्वचा अगर है, तो...
अगर आपकी त्‍वचा रूखी है और खुजली हो रही है, तो काले नमक  को पानी में डालकर नहाकर देखें। राहत मिलेगी। एक्ने की समस्या भी काफी हद तक कम हो करता है काला नमक । ज्‍यादातर साबुन, मास्‍क, टोनर और क्‍लींजर आदि बनाने में काले नमक का प्रयोग किया जाता है। यह नमक  त्‍वचा के  रोम छिद्रों को साफ करता है, जिससे पोर्स में बैक्‍टीरिया नहीं पनप पाते।
स्‍क्रब व टोनर
1 चम्‍मच बारीक  काला नमक  और 1 चम्‍मच ऑलिव ऑइल का पेस्ट बनाकर स्क्रब करें। चेहरा साफ-सुथरा नजर आएगा। टोनर के लिए
रोज वाटर और 1 चम्‍मच काला नमक  मिक्‍स कर आंखें बंद कर चेहरे पर स्प्रे करें। यह तैलीयता भी कम करता है।
क्‍लींजर
किसी भी फेस वॉश में एक  छोटा चम्‍मच काला नमक  डालें। फिर इसे चेहरे पर हल्‍के  से रगड़ें। स्किन साफ हो जाएगी। पीले नाखूनों पर नियमित रूप से काला नमक  रगड़ें, बेजान नाखूनों में जान आ जाएगी। काला नमक बालों को मुलायम, शाइनी और घना बनाता है। गीले बालों में पिसा हुआ काला नमक लगाएं। रूसी खत्म हो जाएगी।
एडिय़ां नर्म-मुलायम
हल्के गर्म पानी में पांव डुबोकर रखें। फटी एडिय़ां ठीक हो जाएंगी। कुछ दिनों तक करके देखें। पैरों के दर्द और सूजन में भी राहत मिलेगी।

"जैतून का तेल" है बालों और त्वचा दोनों के लिए उपयोगी

"जैतून का तेल" है बालों और त्वचा दोनों के लिए उपयोगी 

जैतून का तेल एक अद्भुत पदार्थ है जो कि आपके बालों और त्वचा दोनों के लिए काफी फायदेमंद होता है। अगर आप अंदरूनी रूप से भी स्वस्थ रहना चाहते हैं तो जैतून का तेल खाना बनाने में भी काफी उत्तम होता है। सौंदर्य प्रसाधनों की खरीदारी करते समय स्वास्थ्यवर्धक पदार्थों पर भी समय दें और १ बोतल जैतून का तेल लें। अगर आपकी त्वचा संवेदनशील है तो यह आपके लिए काफी फायदेमंद होगा क्योंकि इसमें विटामिन,फैटी एसिड तथा मिनरल आदि होते हैं। उम्रदराज महिलाओं को भी इससे काफी फायदा होगा क्योंकि इससे त्वचा की झुर्रियां और उम्र का असर कम होता है।
त्वचा के स्वास्थ्य के लिए जैतून का तेल
जैतून का बॉडी लोशन
कुछ महिलाएं नहाने के बाद जैतून का बॉडी आयल लगाना पसंद करती है। यह एक प्राकृतिक मॉइस्चराइज़र होता है जो कि आपकी त्वचा में झुर्रियां होने से रोकता है। इसे लगाने के बाद आपकी त्वचा बच्चों जैसी मुलायम हो जाएगी। ये त्वचा को तुरंत पोषण देने के तरीकों में से एक है।
बालों के पोषण के लिए जैतून का तेल
जैतून के तेल का हेयर मास्क
जैतून के तेल के प्रयोग से बनाया जाने वाला ये एक और हेयर मास्क है। इस प्रक्रिया में आपको कोई और पदार्थ मिलाने का कष्ट नहीं करना पड़ता। सिर्फ बालों में अच्छे से जैतून का तेल लगाने मात्र से ही बालों की कई समस्याएं दूर होती हैं। बाल धोने से कम से कम आधे घंटे पहले बालों में जैतून का तेल लगाएं।
सौंदर्य के लिए जैतून के तेल का प्रयोग
जैतून के तेल के कुछ सौंदर्य आधारित गुण इस प्रकार हैं :-
१. ये शैम्पू लगाने के बाद आपके बालों की अच्छे से कंडीशनिंग करने में सहायता करता है।
२. यह घरेलू स्क्रब के रूप में काफी फायदेमंद है।
३. यह आपकी त्वचा को काफी चिकनाई प्रदान करता है।
४. उपत्वचा को नमी प्रदान करने में ये काफी बड़ी भूमिका निभाता है।
ऑलिव ऑइल-ऑरेंज
संतरे के छिलकों का पाउडर बना लें। इसमें तीन बूंद मोगरे का तेल और ऑलिव ऑइल मिला लें। थोड़ा सा गुलाब जल मिला दें। अगर बहुत ज्यादा पसीना आता है, तो शहद, ऑलिव ऑइल और गुलाब जल मिलाकर त्वचा पर लगाएं। काफी राहत मिलेगी।



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त्वचा के दाग - धब्बे दूर करे "सेंधा नमक"

त्वचा के दाग - धब्बे दूर करे "सेंधा नमक" 

काला नमक या सेंधा नमक को चेहरे पर हल्के हाथों से रगडऩे से चेहरे से दाग-धब्बे दूर होते हैं। साथ ही चेहरे पर चमक लाने में भी मदद मिलती है। आइए जाने इनके फायदे के बारे में ..

काला नमक या सेंधा नमक का सेवन ज्यादातर लोग व्रत के समय में करते हैं। यह सेहत को सही रखने के साथ साथ त्वचा के लिए भी लाभकारी होता है। 


डेड स्किन की सफाई करने में मदद करता है। त्वचा पर डेड स्किन की परत जम जाने से त्वचा की उम्र ज्यादा लगने लगती है इस परत को हटाने के लिए सेंधा नमक से त्वचा को स्क्रब कर सकती हैं। 

आप बॉडी स्क्रब में इसका उपयोग कर सकती हैं। क्लींजर नमक का कण को आपके रोम छिद्रों को अंदर तक  साफ करता है जो कोई भी साबुन नहीं कर सकता है। इससे आपकी त्वचा को फिर से सांस लेने की मौका मिलता है और त्वचा पर ग्लो आती है।

पैरों और हाथों की सफाई के लिए यह नमक त्वचा को ड्राई नहीं बनाता है इसलिए आप इससे पैरों की एडिय़ों और हाथों को स्क्रब कर सकती है। 


आपके हाथ के नाखून पीले हो रहे हैं तो पीलापन दूर करने के लिए सेंधा नमक के पानी में कुछ देर तक हाथ डुबोने से आपके पीले नाखून सफेद हो जाएंगे।


चेहरे से झुर्रियों को दूर करने के लिए सेंधा नमक का इस्तेमाल किया जाता है। सेंधा नमक में नींबू और अदरक के रस के साथ मिलाकर चेहरे पर लगाएं। 

धार्मिक ही नहीं, सेहत के लिए भी उपयोगी है "पीपल"

 धार्मिक ही नहीं, सेहत के लिए भी उपयोगी है "पीपल" 

आयुर्वेद में पीपल के पेड़ का खास महत्‍व है, यह गोनोरिया, डायरिया, पेचिश, नसों का दर्द, नसों में सूजन के साथ झुर्रियों की समस्‍या से से निजात दिलाता है।

फायदेमंद है पीपल का पेड़ :
 यह पेड़ केवल भारतीय उपमहद्वीप में पाया जाता है। भारतीय इस पेड़ का धार्मिक महत्‍व तो है साथ ही आयुर्वेद में इसका खास महत्‍व है। कई बीमारियों का उपचार इस पेड़ से हो जाता है। गोनोरिया, डायरिया, पेचिश, नसों का दर्द, नसों में सूजन के साथ झुर्रियों की समस्‍या से निजात पाने के लिए इस पेड़ का प्रयोग कीजिए। एंटीऑक्‍सीडेंट युक्‍त यह पेड़ हमारे लिए बहुत फायदेमंद है।

झुर्रियों से बचाव : 
पीपल की जड़ों में एंटीऑक्सीडेंट सबसे ज्यादा पाए जाते हैं। इसके इसी गुण के कारण यह वृद्धावस्था की तरफ ले जाने वाले कारकों को दूर भगाता है। इसके  ताजी जड़ों के सिरों को काटकर पानी में भिगोकर पीस लीजिए, इसका पेस्‍ट चेहरे पर लगाने से झुर्रियां से छुटकारा मिलता है।

दाँतो के लिए : 
पीपल की 10 ग्राम छाल, कत्था और 2 ग्राम काली मिर्च को बारीक पीसकर पाउडर बना लीजिए, नियमित रूप से इसका मंजन करने से दांतों का हिलना, दांतों में सड़न, बदबू आदि की समस्‍या नहीं होती है और यह मसूड़ों की सड़न को भी रोकता है।

दमा में फायदेमंद : 
पीपल की छाल के अन्दर का भाग निकालकर इसे सुखा लीजिए, और इसे महीन पीसकर इसका चूर्ण बना लें, इस चूर्ण को दमा रोगी को देने से दमा में आराम मिलता है।

दाद खाज़ -खुजली में फायदेमंद : 
पीपल के 4-5 कोमल, नरम पत्ते खूब चबा-चबाकर खाने से, इसकी छाल का काढ़ा बनाकर आधा कप मात्रा में पीने से दाद, खाज, खुजली जैसे चर्म रोगों में आराम होता है।

फटी एड़ियों के लिए : 
पैरों की फटी पड़ी एड़ियों पर पीपल के पत्‍ते से दूध निकालकर लगाने से कुछ ही दिनों फटी एड़ियां सामान्य हो जाती हैं और तालु नरम पड़ जाते हैं।

घावों को भरे : 
पीपल के ताजे पत्तों को गर्म करके घावों पर लेप किया जाए तो घाव जल्द सूख जाते हैं। अधिक गहरा घाव होने पर ताजी पत्तियों को गर्म करके थोडा ठंडा होने पर इन पत्तियों को घाव में भर देने से कुछ दिनों में घाव भर जाते हैं।

जुकाम होने पर : 
पीपल के कोमल पत्तों को छाया में सुखाकर उसे अच्‍छे से पीस लीजिए, इसे आधा लीटर पानी में एक चम्मच चूर्ण डालकर काढ़ा बना लें। काढ़े में पीसी हुई मिश्री मिलाकर कुनकुना करके पीने से नजला-जुकाम से राहत मिलती है।

नकसीर होने पर : 
नकसीर की समस्‍या होने पर पीपल के ताजे पत्तों का रस नाक में टपकायें, इससे नकसीर की समस्‍या से आराम मिलता है। 

"गिलोय" है स्वास्थ्य के लिए कई तरह से लाभकारी

"गिलोय" है स्वास्थ्य के लिए कई तरह से लाभकारी 

गिलोय के स्वास्थ्य लाभ :
 गिलोय के पत्ते पान के पत्ते की तरह होते हैं। गिलोय इतनी गुणकारी है कि इसका नाम अमृता रखा गया है। इसकी पत्तियों में कैल्शियम, प्रोटीन, फास्‍फोरस और तने में स्टार्च पाया जाता है। यह वात, कफ और पित्तनाशक होती है। गिलोय शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है। साथ ही इसमें एंटीबायोटिक और एंटीवायरल तत्‍व भी होते है।

खून की कमी करे दूर : 
गिलोय शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है और शरीर में खून की कमी को दूर करता है। इसके लिए प्रतिदिन सुबह-शाम गिलोय का रस घी या शहद मिलाकर सेवन करने से शरीर में खून की कमी दूर होती है।

पीलिया में हैं फायदेमंद :
 गिलोय का सेवन पीलिया रोग में भी बहुत फायदेमंद होता है। इसके लिए गिलोय का एक चम्मच चूर्ण, काली मिर्च अथवा त्रिफला का एक चम्मच चूर्ण शहद में मिलाकर चाटने से पीलिया रोग में लाभ होता है। या गिलोय के पत्तों को पीसकर उसका रस निकाल लें। एक चम्‍मच रस को एक गिलास मट्ठे में मिलाकर सुबह-सुबह पीने से पीलिया ठीक हो जाता है।

जलन दूर करे :
 अगर आपके पैरों में जलन होती है और बहुत उपाय करने के बाद भी आपको कोई फायदा नहीं हो रहा है तो आप गिलोय का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए गिलोय के रस को नीम के पत्ते एवं आंवला के साथ मिलाकर काढ़ा बना लें। प्रतिदिन 2 से 3 बार इस काढ़े का सेवन करें इससे हाथ पैरों और शरीर की जलन दूर हो जाती है।
कान दर्द में लाभकारी : 
गिलोय के पत्तों के रस को गुनगुना करके कान में डालने से कान का दर्द ठीक होता है। साथ ही गिलोय को पानी में घिसकर और गुनगुना करके दोनों कानों में दिन में 2 बार डालने से कान का मैल निकल जाता है।

उल्टियों में फायदेमंद :
 गर्मियों में कई लोगों को उल्‍टी की समस्‍या होती हैं। ऐसे लोगों के लिए भी गिलोय बहुत फायदेमंद होता है। इसके लिए गिलोय के रस में मिश्री या शहद मिलाकर दिन में दो बार पीने से गर्मी के कारण से आ रही उल्टी रूक जाती है।

पेट के रोगों में लाभकारी : 
गिलोय के रस या गिलोय के रस में शहद मिलाकर सेवन करने से पेट से संबंधित सभी रोग ठीक हो जाते है। इसके साथ ही आप गिलोय और शतावरी को साथ पीस कर एक गिलास पानी में मिलाकर पकाएं। जब उबाल कर काढ़ा आधा रह जाये तो इस काढ़े को सुबह-शाम पीयें।

खुजली दूर भगाए :
 खुजली अक्‍सर रक्त विकार के कारण होती है। गिलोय के रस पीने से रक्त विकार दूर होकर खुजली से छुटकारा मिलता है। इसके लिए गिलोय के पत्तों को हल्दी के साथ पीसकर खुजली वाले स्थान पर लगाइए या सुबह-शाम गिलोय का रस शहद के साथ मिलाकर पीएं।